अभी दो महीने भी नहीं बीते हैं जब भारत और चीन ने घोषणा की थी कि डोकलाम पठार को लेकर बनी विवादित स्थिति ख़त्म हो गई है. यहां से दोनों ही देशों के सैनिक अब मौज़ूद नहीं है. लेकिन अब सूत्रों के हवाले से आई ख़बर की मानें तो यह सिर्फ आधा सच हो सकता है. पूरी सच्चाई ये है कि भारत-चीन और भूटान के बीच विवाद का केंद्र बने डोकलाम के एक हिस्से में चीनी सैनिक अब भी मौज़ूद हो सकते हैं.

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक विदेश मामलों की संसदीय समिति के सामने विदेश सचिव विजय गोखले ने ख़ुद माना है कि डोकलाम में चीनी सैनिकों की मौज़ूदगी से इंकार नहीं किया जा सकता. बल्कि उन्होंने तो वहां शायद भारत-चीन सीमा से थोड़ी ही दूरी पर कुछ निर्माण भी कर रखे हैं. अख़बार के मुताबिक सिर्फ गोखले ही नहीं उनके पूर्ववर्ती एस जयशंकर ने भी इसी संसदीय समिति के सामने यही बात कही थी. उनके मुताबिक डोकलाम के उत्तरी क्षेत्र में चीनी सैनिकों की मौज़ूदगी हो सकती है.

अख़बार ने बताया है कि विदेश मामलों की संसदीय समिति ने भारत-चीन संबंधों, डोकलाम विवाद और सीमा के हालात जैसे मुद्दों पर एक रिपोर्ट तैयार की है. उसी में गोखले और एस जसशंकर के बयान दर्ज़ हैं. उनके अलावा इसमें पूर्व रक्षा सचिव संजय मित्रा और पूर्व सेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर के बयान भी हैं. कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली इस समिति की रिपोर्ट की प्रति इसके विभिन्न सदस्यों- राहुल गांधी, वरुण गांधी, स्वपन दासगुप्ता, रिचर्ड हे, राघव लखनपाल आदि को दी गई है.

ग़ौरतलब है कि डोकलाम मूल रूप से भूटान के अधिकार क्षेत्र में आता है, जो भारत की सीमा से लगता है और उसके लिए सामरिक महत्व का भी है. लेकिन इस पर चीन अपना हक़ जताता है. वह यहां मोटरगाड़ियों के चलने लायक सड़क बनाने की कोशिश में है. इसीलिए जून-2017 के बाद से लगभग ढाई महीने तक भारत-चीन के बीच सैन्य गतिरोध पैदा हो गया था. दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आ गई थीं. क्योंकि भारत ने भूटान को सामरिक सुरक्षा का भरोसा दे रखा है. हालांकि बाद में बड़ी मुश्किल से बातचीत से वह मामला शांत हुआ था.