संसद का मौजूदा मॉनसून सत्र कामकाज के लिहाज से पिछले 18 सालों में सबसे अच्छा रहा. इस दौरान 12 विधेयक पारित किए गए. हिंदुस्तान टाइम्स ने संसदीय कार्य मंत्रालय के हवाले से खबर दी है कि 18 जुलाई से 10 अगस्त के बीच लोकसभा में 118 प्रतिशत काम हुआ. प्रश्नकाल में 84 प्रतिशत काम हुआ. वहीं, राज्यसभा में भी नियत समय के मुताबिक 68 प्रतिशत काम हुआ.

हाल के संसदीय सत्र सफलतापूर्वक नहीं चले थे. बजट सत्र का दूसरा चरण लगभग पूरी तरह बिना काम के गया, खास तौर पर राज्यसभा में. वहीं, इस सत्र में सरकार ने अविश्वास प्रस्ताव की परीक्षा सफलतापूर्वक पास की और राज्यसभा ने अपना नया उपसभापति भी चुना. ये दोनों बड़े काम तब हुए जब विपक्ष रफाल विमान समझौते, एनआरसी और आंध्र प्रदेश को लेकर किए गए वादों को लेकर एनडीए सरकार का विरोध कर रहा था.

सत्र के दौरान लोकसभा में कुल 17 विधेयक पेश किए गए. वैधानिक कार्यों के लिए नियत किए गए 102 घंटों में से 49 घंटे इन विधेयकों को पेश करने में लगे. विशेषज्ञों का कहना है कि 16वीं लोकसभा के कार्यकाल में और 2004 के बाद दोनों सदनों द्वारा वैधानिक कार्यों के लिए दिया गया यह सबसे अधिक समय है. शुक्रवार को कांग्रेस ने संसद परिसर में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था. लेकिन विरोधों के बावजूद संसद का कार्य बाधित नहीं हुआ. जबकि छुटपुट विरोधों के चलते बजट सत्र के दूसरे चरण में भी खास काम नहीं हुआ था.

इस सत्र में दो काफी अहम विधेयक पास हुए. देश को आर्थिक नुकसान पहुंचा कर विदेश भागने के मामलों के मद्देनजर ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक’ और एससी-एसटी एक्ट को पहले की स्थिति में लाने संबंधी विधेयक सफलतापूर्वक पारित किए गए. पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने से संबंधित विधेयक भी संसद में पारित हो गया. हालांकि तीन तलाक के मुद्दे पर सरकार को केवल लोकसभा में कामयाबी मिली. राज्यसभा में वह इससे संबंधित विधेयक पारित नहीं करवा सकी.

सत्र के दौरान सरकार को लोकसभा में ‘वित्तीय समाधान और निक्षेप बीमा विधेयक’ वापस लेना पड़ा. विधेयक में जमानत संबंधी नियमों को लेकर विवाद था जिसके चलते इसे वापस लिया गया. हालांकि वित्त मंत्रालय ने कहा कि विधेयक को लेकर जाहिर की गईं चिंताओं पर काम करने के बाद इसे वापस पेश किया जा सकता है.