मालदीव से भारत के लिए बुरी खबरों का सिलसिला जारी है. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक हिंद महासागर में स्थित इस द्वीप देश के भारत में राजदूत अहमद मोहम्मद ने कहा है कि भारत, मालदीव में तैनात अपने सैन्य हेलिकॉप्टरों और अधिकारियों को वापस बुला ले. उनके मुताबिक भारतीय हेलिकॉप्टरों और अधिकारियों को बीती एक जून तक ही वहां रहने का अधिकार था.

अहमद मोहम्मद ने रॉयटर्स को बताया कि भारत ने मेडिकल सहायता के तहत मालदीव को दो सैन्य हेलिकॉप्टर मुहैया कराए थे लेकिन, अब उनकी कोई जरूरत नहीं है क्योंकि मालदीव ने अपने लिए पर्याप्त संसाधन जुटा लिए हैं. उन्होंने कहा, ‘वे (हेलिकॉप्टर) पहले काफी काम आए हैं. लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर, सुविधाओं और संसाधनों के विकास के बाद हम खुद ही मेडिकल सुविधाएं दे सकते हैं.’ हालांकि अहमद ने कहा कि दोनों देशों के सैनिक द्वीपों के विशेष क्षेत्र की संयुक्त निगरानी कर रहे हैं.

भारत के दक्षिणपश्चिम में 400 किलोमीटर पर स्थित मालदीव, चीन और मध्य पूर्व के बीच पड़ने वाला दुनिया का सबसे व्यस्त समुद्री रास्ता है. हेलिकॉप्टरों के अलावा भारत ने यहां अपने सैनिकों की भी तैनाती की है. इनमें पायलट और रखरखाव दल के लोग शामिल हैं जिनके वीजा का समय खत्म हो चुका है. इसके बाद भी भारत ने उन्हें वापस नहीं बुलाया है. इस पर भारतीय नौसेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि विदेश मंत्रालय इस स्थिति से निपटने की कोशिश कर रहा है. उधर, विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर किए गए सवाल पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

मालदीव को लेकर भारत और चीन में टकराव चल रहा है. चीन वहां सड़कों, पुलों और एक बड़े हवाई अड्डे का निर्माण कर रहा है. इससे मालदीव पर भारत की पकड़ कमजोर हो रही है जो दशकों से वहां सैन्य व नागरिक सेवाएं दे रहा है. इसके अलावा इस साल जब मालदीव में आपातकाल लगा तो भारत ने उसका विरोध किया था. उस दौरान राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन ने अपने कई राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को कैद कर लिया था. उन राजनेताओं ने भारत से मदद मांगी थी. तभी से मालदीव की सरकार का रवैया भारत को लेकर सकारात्मक नहीं रहा है. इसका सीधा असर उन कार्यक्रमों पर पड़ा है जिनके तहत भारत छोटे देशों को सुरक्षा सहायता देता है.