दिल्ली के नेहरू स्मृति संग्रहालय एवं पुस्तकालय (एनएमएमएल) का स्वरूप बदलने की कोशिशें हो रही हैं. एनएमएमएल में होने वाले आयोजन से जुड़े आंकड़े इसकी गवाही देते हैं. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक जनवरी 2017 से मई 2018 तक एनएमएमएल में 152 कार्यक्रम हुए. इनमें 50 से अधिक कार्यक्रमों में केंद्रीय मंत्री तथा भारतीय जनता पार्टी-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों ने अपनी मौज़ूदगी दर्ज़ कराई. इनमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल रहे. वहीं केंद्र के मंत्रियों में स्मृति ईरानी, महेश शर्मा और प्रकाश जावड़ेकर प्रमुख रहे. जबकि आरएसएस के पदाधिकारियों में कृष्ण गोपाल का नाम आगे रहा.

वहीं जनवरी 2013 से मई 2014 के दौरान जब केंद्र में यूपीए (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) की सरकार थी तो एनएमएमएल में 265 कार्यक्रम हुए. इनमें से सिर्फ एक कार्यक्रम में इक़लौते तत्कालीन केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ही शामिल हुए. उनके अलावा 22 अन्य कार्यक्रमाें में यूपीए से जुड़े अन्य पदाधिकारियों- हरीश खरे, शिवशंकर मेनन, गोपालकृष्ण गांधी और मृणाल पांडे आदि ने हिस्सा लिया. स्वाभाविक तौर पर इस स्थिति के मद्देनज़र भाजपा-कांग्रेस में आरोप-प्रत्यारोप भी अक़्सर होते रहते हैं.

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि अब यह संस्थान ‘बेहद पक्षपाती’ हो गया है. वहीं भाजपा का कहना है कि संस्थान में ‘अब कहीं जाकर वैचारिक संतुलन’ आया है. भाजपा के राज्य सभा सदस्य विनय सहस्रबुद्धे के मुताबिक, ‘एनएमएमएल सालों साल तक वैचारिक रूप से एक तरफ झुका रहा है. लेकिन अब उसमें ताज़ा हवा का प्रवेश हुआ है. अब वहां जो गतिविधियां हो रही हैं उनमें यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी से कोई पक्षपात न हो. वहां अब हर विचारधारा का स्वागत किया जा रहा है.’