प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार 11 अगस्त को आयोजित आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) बॉम्बे के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि हैं. लेकिन उन्हें इस कार्यक्रम में बुलाने पर संस्थान के ही कुछ छात्रों ने सवाल खड़ा कर दिया है.

संस्थान के छात्रों ने इस बाबत एक बयान जारी किया है. इसमें कहा है, ‘हम मौज़ूदा सरकार से सवाल करना चाहते हैं, जिसके मुखिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं. हम जानना चाहते हैं कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनकी सरकार ने अब तक कौन सा उल्लेखनीय योगदान दिया है? सामाजिक समरसता और आम नागरिकों के मूलभूत अधिकारों को प्रभावित करने वाले मसलों पर उनकी सरकार ने क्या-कुछ किया है?’ हालांकि यह बयान जारी करने वाले छात्रों ने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं की है.

ख़बरों के मुताबिक बयान जारी करने वाले छात्रों ने यह भी कहा है कि वे दीक्षांत समारोह के दौरान प्रधानमंत्री को बोलने से नहीं रोकेंगे. वे न ही उनका विरोध करेंगे. लेकिन फिर भी उनकी नज़र में प्रधानमंत्री को बुलाने का संस्थान का फैसला प्रश्नचिह्न के दायरे में आता है क्योंकि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कामों के मामले में मोदी सरकार का रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं है. यहां तक कि शिक्षा के क्षेत्र में केंद्र सरकार की ओर से आवंटित बजट भी कम हो रहा है. सो ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि प्रधानमंत्री क्या सच में ‘सबके लिए शिक्षा’ के ध्येय वाक्य पर भरोसा करते हैं? इसे मूर्त रूप देने की उनकी मंशा है?

ग़ौरतलब है कि आईआईटी बॉम्बे का यह 56वां दीक्षांत समारोह है. इसमें भाग लेने के बाद प्रधानमंत्री यहां ऊर्जा विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग तथा पर्यावरण विज्ञान एवं अभियांत्रिकी केंद्र की नई इमारत का उद्घाटन भी करने वाले हैं.