भारत से हज यात्रा में जा रहे पहले दल में महाराष्ट्र की 16 महिलाएं बिना मेरहम (पति या रक्त संबंधी पुरुष जो संरक्षक की भूमिका में महिलाओं के साथ हज पर जाता है) के हज यात्रा पर जाएंगी. यह पहली बार है जब भारत से महिलाएं बिना मेरहम के हज यात्रा पर जा रही हैं. सऊदी अरब की सरकार से मिली छूट के बाद भारत की हज यात्रा कमेटी ने 45 वर्ष से अधिक उम्र वाली महिलाओं को पुरुष साथी के बिना हज यात्रा में जाने की अनुमति दी थी. इसके तहत चार के समूह में यात्रा कर रही महिलाओं को बिना मेरहम के हज यात्रा में जाने की अनुमति है. इस साल बिना मेरहम के 1308 महिलाएं हज यात्रा करेंगी.

62 साल की शमशादाबाई सईद भी बिना मेरहम के हज यात्रा पर जाने वाली महिलाओं में शामिल हैं. हिन्दुस्तान टाइम्स से बात करते हुए वे जानकारी देती हैं कि वे अपनी बहू नज़ीन सईद और अन्य महिला साथियों के साथ हज पर जा रही हैं. हालांकि बिना मेरहम के हज यात्रा में जाने को लेकर वे थोड़ी चिंतित जरूर हैं. नज़ीन सईद बताती है, ‘समाज की परंपरा तोड़कर हम बिना मेरहम के हज पर जा रही हैं और ऐसे में लोग क्या कहेंगे उन्हें इसी बात की चिंता है. लेकिन, हम वहां जाना चाहते हैं और महिलाओं के लिए मिसाल पेश करना चाहते हैं.’

इससे पहले जुलाई में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने बिना मेरहम के महिलाओं को हज यात्रा की अनुमति देने के निर्णय को मील का पत्थर करार दिया था. इसके साथ ही उन्होंने जानकारी दी थी कि इस बार भारत से रिकॉर्ड 1,75,025 लोग हज यात्रा पर जा रहे हैं, जिनमें से 47 प्रतिशत महिलाएं हैं