केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जनप्रतिनिधित्व कानून-2017 में संशोधन किया है. इसके जरिए अप्रवासी भारतीयों को इजाज़त दी गई है कि वे भारत में रह रहे अपने परिवार के किसी सदस्य को अपनी तरफ से वोट डालने (प्रॉक्सी वोटिंग) के लिए अधिकृत कर सकते हैं. जानकारों की मानें तो इस संशोधन के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं. यह मोदी सरकार को 2019 में फिर सत्ता तक पहुंचाने में मददग़ार हो सकता है.

जानकारों के हवाले से द टाइम्स ऑफ इंडिया ने जो ख़बर दी है उसके मुताबिक देश से बाहर 11 करोड़ अप्रवासी भारतीय मतदाता रह रहे हैं. यानी प्रति लोक सभा क्षेत्र के हिसाब से यह आंकड़ा औसतन 21,000 वोटों का बैठता है. यह संख्या निर्णायक मानी जा सकती है क्योंकि बीते कुछ चुनावों से लगातार जीतने वाले प्रत्याशी और उसके निकटम प्रतिद्वंद्वी के बीच वोटों का अंतर कम हाे रहा है.

इससे जुड़ा दूसरा तथ्य ये है अप्रवासी भारतीय अपने वोट के लिए परिवार में किसी को अधिकृत तो करेंगे ही वे दल विशेष के पक्ष में भारत में रह रहे परिजनों के बीच माहौल भी बनाएंगे. ऐसे भी वे किसी प्रत्याशी की जीत-हार तय करने में भूमिका निभा सकते हैं. और इसी का तीसरा पहलू ये है कि नरेंद्र मोदी अपनी विदेश यात्राओं के जरिए अब तक विभिन्न देशों में रह रहे क़रीब एक करोड़ अप्रवासी भारतीयों से सीधे संपर्क स्थापित कर चुके हैं. अप्रवासी भारतीयों के बीच उनका जनाधार देश के दूसरे किसी भी नेता से ज़्यादा माना जाता है.