आमतौर पर गिरने, टकराने या चोट लगने पर यही होता है कि हम जरा देर के लिए रुककर आसपास देखते हैं और अगर फजीहत होती दिखती है तो हंसते हुए, नहीं तो संभलते-कराहते हुए आगे बढ़ जाते हैं. लेकिन कुहनी पर चोट लगने के मामले में बात जरा अलग हो जाती है. अगर कभी कुहनी का एक विशेष हिस्सा कहीं टकरा जाता है तो दिमाग में सबसे पहले टन्न की आवाज आती है और भीतर ही भीतर आपको तेज झनझनाहट महसूस होती है. यह भी दिलचस्प है कि हर बार कुहनी पर चोट लगने पर ऐसा ही अजीब सा महसूस होता है और हर किसी के साथ होता है. ऐसा क्यों होता है, इस बार सिर-पैर के सवाल में यही जानने की कोशिश करते हैं.

कुहनी की जिस हड्डी के कहीं टकराते ही हमें तेज करंट लगता है या हंसी सी आती है, उसे सामान्य बोलचाल में फनी बोन कहा जाता है. चिकित्सा विज्ञान की भाषा में बात करें तो फनी बोन असल में अल्नर नर्व (तंत्रिका) होती है. यह नर्व हमारी गर्दन (कॉलर बोन), कंधे और हाथों से होते हुए जाती है और कलाई के पास से बंटकर अनामिका (रिंग फिंगर) और छोटी उंगली पर खत्म होती है. यहां पर आपको बताते चलते हैं कि नर्व्स का काम मस्तिष्क से मिलने वाले संदेशों को शरीर के बाकी अंगों तक लाना, ले जाना होता है.

शरीर के संपूर्ण तंत्रिका तंत्र की तरह अल्नर नर्व का भी ज्यादातर हिस्सा हड्डियों, मज्जा और जोड़ों के बीच सुरक्षित होता है. लेकिन कुहनी से गुजरने वाला हिस्सा केवल त्वचा और फैट से ढका होता है. ऐसे में जैसे ही कुहनी कहीं से टकराती है तो सीधे इस नर्व पर झटका लगता है. इसे दूसरी तरह से कहें तो फनी बोन पर चोट लगने का सीधा मतलब है अल्नर नर्व का हड्डी और उस बाहरी चीज, जिससे वह टकराती है, के बीच दब जाना. सीधे नर्व पर पड़ने वाला यह दबाव आपको एक तेज झनझनाहट, गुदगुदी और दर्द का मिलाजुला अनुभव देता है. यही वजह है कि कुहनी पर कभी भी, कैसे भी चोट लगे, हर बार आपको उतना ही अजीब महसूस होता है.

चलिए, इसी के साथ अब यह भी जान लेते हैं कि अल्नर नर्व को फनी बोन नाम कैसे मिला. चिकित्सा जगत में इस सवाल के दो जवाब मिलते हैं. पहले जवाब के अनुसार अल्नर नर्व हमारी बांह की हड्डी से होकर गुजरती है जिसे मेडिकल लैंग्वेज में ह्यूमर्स कहा जाता है. ह्यूमर्स शब्द ह्यूमरस (मजेदार) से मिलता-जुलता शब्द है. कुछ लोग मानते हैं कि इसी समानता के कारण इसे फनी बोन नाम दिया गया है. दूसरा जवाब, इस नाम की वजह अल्नर नर्व पर चोट लगते ही आपको हंसी, गुस्सा या करंट लगने की मिली-जुली मगर अजीब सी अनुभूति का होना बताता है.