मद्रास हाईकोर्ट में नई मुख्य न्यायाधीश विजया कमलेश ताहिलरमानी के आने के साथ विवाद भी शुरू हो गया है. ताहिलरमानी के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हाईकोर्ट के जजों को मंत्रियों और अफसरों से पीछे बिठाए जाने की वज़ह से ताज़ा विवाद पैदा हुआ है. शपथ समारोह इसी रविवार को तमिलनाडु के राजभवन में हुआ था.

बताया जाता है कि जिस वक़्त राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित जस्टिस ताहिलरमानी काे मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ दिला रहे थे उस समय हाईकोर्ट के तमाम जज मंत्रियों और यहां तक कि राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अफसरों के पीछे बैठे थे. ख़बरों के मुताबिक इस पर कुछ जजों ने खुलकर आपत्ति जताई है. जस्टिस एमएस रमेश ने राजभवन से सीधा सवाल पूछा है कि क्या यह सब जानबूझकर किया गया? उन्होंने कहा कि यह न सिर्फ निराशाजनक बल्कि चिंता का विषय भी है.

जस्टिस रमेश ने पूछा, ‘क्या राजभवन का स्टाफ संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों (जजों) और प्रशासनिक-पुलिस अफसरों के पदानुक्रम से परिचित नहीं है. या फिर यह मान लिया गया है कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का नंबर मंत्रियों और पुलिस अफसरों के भी बाद आता है?’ हालांकि इस संबंध में जब अख़बार ने राजभवन से संपर्क किया तो बताया गया कि हाईकोर्ट के जजों की कोई शिकायत वहां नहीं पहुंची है. वैसे जस्टिस रमेश इससे पहले भी मदुरै के एक मामले में भी ऐसी ही आपत्ति जता चुके हैं. इस साल के शुरूआत में ही मीनाक्षी मंदिर में हुए एक कार्यक्रम के दौरान भी मंत्रियों को बिठाने के लिए जजों को उनकी कुर्सी से उठा दिया गया था.