तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) की अब तक कमान संभालते रहे पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि का बमुश्किल एक सप्ताह पहले ही निधन हुआ है. और इतने कम समय के भीतर ही पार्टी की कमान किसके हाथ में हो इस पर संघर्ष के आसार बन गए हैं. हालांकि करुणानिधि ने अपने जीवनकाल में ही छोटे पुत्र एमके स्टालिन को अपना उत्तराधिकार सौंप दिया था. लेकिन अब उनके बाद स्टालिन के सबसे बड़े भाई एमके अलागिरी उन्हें चुनौती देने के मूड में नज़र आ रहे हैं.

ख़बरों के मुताबिक मंगलवार को डीएमके की अहम बैठक होने वाली है. इसमें एमके स्टालिन को अगला प्रमुख चुना जा सकता है. लेकिन इससे पहले ही अलागिरी ने सोमवार को उन्हें एक तरह से चुनौती दे दी. चेन्नई के मरीना बीच (समुद्र तट) में पिता करुणानिधि की समाधि पर पुष्प अर्पित करने के बाद अलागिरी ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘मैं इस बारे (पार्टी नेतृत्व के मसले पर) में अभी कुछ नहीं कह सकता. मैं अपने पिता के निधन के दुख से अभी उबर नहीं पाया हूं. बस इतना कहूंगा कि डीएमके के असली कार्यकर्ता और मेरे पिता के समर्थक मेरी तरफ हैं. बाकी समय ही इस पर सही ज़वाब देगा.’

अलागिरी के बयान को स्टालिन के लिए चुनौती माना जा रहा है, जिन्होंने अभी औपचारिक तौर पर पार्टी नेतृत्व संभाला नहीं है. उन्हें करुणानिधि ने जनवरी 2017 में कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था. वे अभी इसी हैसियत से पार्टी का काम देख रहे हैं. जहां तक 67 वर्षीय अलागिरी का सवाल है तो जनवरी 2014 में उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों की वज़ह से डीएमके से निकाल दिया गया था. हालांकि इसके बाद भी वे मदुरै और उसके आसपास अच्छा असर रखने वाले माने जाते हैं. लेकिन पार्टी नेताआें की मानें तो स्टालिन का पार्टी पर पूरा नियंत्रण है. उनके नेतृत्व को चुनौती नहीं है. ऐसे में अलागिरी अपनी राह जरूर अलग कर सकते हैं.