जो दिल्ली के मुखर्जी नगर और नेहरू विहार से परिचित हैं उनके मन में ये नाम सुनते ही देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने यहां आए छात्रों की तस्वीर उभरकर सामने आ जाती है. लेकिन इन दिनों उत्तरी दिल्ली का यह इलाका छात्रों और स्थानीय लोगों के बीच टकराव की वजह से चर्चा में है. छात्रों के गुस्से की वजह मकान के बढ़े हुए किराए, ब्रोकरों की मनमानी और खस्ताहाल सुरक्षा व्यवस्था बताई जा रही है.

बीते शनिवार को जब हम इस मामले की पड़ताल के लिए नेहरू विहार पहुंचे तो एक स्थानीय पार्क में सैकड़ों की संख्या में छात्र इकट्ठा थे. विरोध प्रदर्शन की तैयारी चल रही थी. इन छात्रों का आरोप है कि बीती 10 अगस्त को एक छात्र की किराये को लेकर एक ब्रोकर से बहस हुई थी जिसके बाद ब्रोकर ने छात्र के साथ मारपीट की. छात्रों ने बताया कि जब पीड़ित छात्र और उसके कुछ साथी पुलिस में एफआईआर लिखाने गए तो उनको बैरंग लौटा दिया गया जिसके चलते उन्हें विरोध प्रदर्शन के लिए के मजबूर होना पड़ा.

उधर, पुलिस और स्थानीय लोगों का कहना इसके उलट है. उनका आरोप है कि उपद्रव छात्रों ने किया और स्थानीय लोगों की गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई. हालांकि छात्र इन आरोपों से इनकार कर रहे हैं. उनका कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध कर रहे छात्रों पर स्थानीय लोगों ने पत्थर फेंके और फिर पुलिस ने उन पर लाठियां भांजीं.

मुखर्जी नगर में रहने वाले युवा साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता लेखक नीलोत्पल मृणाल भी छात्रों के विरोध प्रदर्शन में शामिल थे. वे बताते हैं कि शांतिपूर्वक विरोध कर रहे छात्रों पर स्थानीय लोगों ने पत्थर फेंके और पुलिस ने उनकी मदद के बजाय उनपर ताबड़तोड़ लाठियां बरसाईं. इस दौरान कई छात्र घायल हुए. नीलोत्पल को भी चोटें आई हैं.

प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने आये रोहित पटेल कहते हैं कि पुलिस उन्हें बेवजह उठाकर ले गई. उनका आरोप है कि इस दौरान जबरदस्ती उनके फोन का पासवर्ड खुलवाकर उनका फोन चेक किया गया और उन्हें विरोध प्रदर्शन से दूर रहने को कहा गया.

नेहरू विहार के इस इलाके में आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले छात्र भी इकट्ठा हुए थे. इन छात्रों की शिकायत है कि उनसे मामूली सुविधाओं के एवज में भारी किराया वसूला जाता है. विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्र लक्ष्मण कहते हैं कि इस पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था इन्हीं छात्रों के बल पर चलती है, लेकिन इनके हितों का ख्याल रखने वाला कोई नहीं है. लक्ष्मण 10 साल पहले यहां सिविल सेवा की तैयारी करने के लिए आये थे.

छात्र बताते हैं कि यहां किराए पर कमरा लेने के लिए ब्रोकर के पास जाना पड़ता है और इसके एवज में किराये का 50 फीसद कमीशन के रूप में ब्रोकर को देना होता है. मकान मालिक एक महीने का एडवांस सिक्योरिटी के रूप में जमा करा लेता है. छात्रों के मुताबिक कमरा छोड़ने के समय यह पैसा वापस मिलना लगभग नामुमकिन होता है. दोबारा कमरा लेने के समय ब्रोकर को फिर से कमीशन देना पड़ता है.

छात्रों की शिकायत है कि बिजली के बिल में भी मनमानी होती है. बिल आठ रुपये से लेकर दस रुपये यूनिट के हिसाब लिया जाता है. उनकी मांग है कि रेट एग्रीमेंट अधिनियम लागू किया जाए और ब्रोकरों की व्यवस्था खत्म की जाए. वे चाहते हैं कि मकान मालिक घर के बाहर कमरा खाली होने की प्लेट लगाएं ताकि बाहर से आए छात्रों का शोषण रुक सके.

छात्रों के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था भी यहां की एक प्रमुख समस्या है, खासकर बाहर से आये छात्रों को छीना-झपटी से लेकर छेड़खानी जैसी तमाम तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. आए दिन उनके लैपटॉप और मोबइल फोन चोरी होते हैं. सहारनपुर से आयी अंजलि बताती हैं कि देर शाम बिना पुरुष दोस्तों के लाइब्रेरी से कमरे तक जाना मुश्किल हो जाता है. वे कहती हैं, ‘रास्ते में लोकल लड़कों की छेड़छाड़ आम बात है. इनमें से कई नशे में होते हैं.’

छात्रों का कहना है कि स्थानीय लोग उन्हें अपमानित करते हैं. बिहार के सीतामढ़ी से आए दिव्य प्रकाश कहते हैं कि उन्हें क्षेत्रीय और नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ता है. वे कहते हैं, ‘घर से सख्त आदेश मिला है कि चुपचाप पढ़ाई पर ध्यान लगाएं, लेकिन आखिर छात्र कब तक चुप बैठेंगे? व्यवस्था को सुधारने के लिए विरोध तो करना पड़ेगा.’ दिव्य प्रकाश कुछ दिन पहले छीना-झपटी का शिकार भी हो चुके हैं.

विरोध कर रहे छात्रों में से एक मुकेश घोष पुलिस की नौकरी छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी करने के लिए यहां आए हैं. मुकेश कहते हैं, ‘क्षेत्रीय सांसद और विधायक हमारी किसी समस्या की ओर इसलिए ध्यान नहीं देते क्योंकि हम इनका वोट बैंक नहीं हैं.’ छात्र यह भी आरोप लगाते हैं कि पुलिस स्थानीय ब्रोकरों से मिली हुई है और राजनीतिक महकमा छात्रों की समस्याओं की अनदेखी करता है. उनके मुताबिक कुछ दिन पहले वे इस मुद्दे को लेकर क्षेत्रीय सांसद मनोज तिवारी भी मिले थे, लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला.

जब हम इस संबंध में पुलिस से बात करने तिमारपुर थाने पहुंचे तो वहां थाना इंचार्ज मौजूद नहीं थे. मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने इस बारे में बात करने से इनकार कर दिया. हमने एसएचओ ओपी सिन्हा से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने फोन ही काट दिया.

उत्तरी दिल्ली के इन छात्र बहुल इलाकों की हर गली में आपको ब्रोकर मिल जाएंगे. ये प्रॉपर्टी डीलर संगठित रुप से अपना काम कर रहे हैं. संजय स्थानीय निवासी हैं और ब्रोकर का काम करते हैं. वे इस पूरी समस्या की जड़ मोदी सरकार को बताते हैं. वे कहते हैं, ‘मोदी जी ने दो करोड़ रोजगार देने की बात कही थी, लेकिन रोजगार कहीं नहीं हैं. बेरोजगारी बढ़ रही है ऐसे में यहां छात्रों की संख्या बढ़ी है, अब मांग अधिक है तो किराए में बढ़ोत्तरी भी होगी ही.’ एक अन्य ब्रोकर गुरमीत बताते हैं कि छात्रों की समस्याओं पर डीलर एशोसिएशन काम कर रही है. वे बताते हैं, ‘हम जल्दी ही एक हेल्पलाइन नंबर जारी करने जा रहे हैं और यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी के धोखाधड़ी न होने पाए.’

उधर, स्थानीय निवासी छात्रों के इस विरोध प्रदर्शन को फर्जी और बेवजह बता रहे हैं. उनका कहना है कि छोटी सी बात को तूल दिया जा रहा है. ऐसे ही एक स्थानीय निवासी विक्की कहते हैं, ‘ये पढ़े लिखे लोग हैं, इन्हें कौन बेवकूफ बना सकता है.’ उनका कहना था कि छात्र बेवजह की बात को मुद्दा बना रहे हैं. इलाके की एक बुजुर्ग कृष्णा कुमारी कहती हैं, ‘चोरी तो सबके घरों में होती है. इन्हें ही इसका शिकार होना पड़ता है, ये बात गलत है.’