कुछ दिनों पहले की बात है. भारतीय जनता पार्टी की संसदीय पार्टी की बैठक में विदेश मंत्री और पार्टी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने सांसदों को कहा कि 10 अगस्त के बाद उन्हें दिल्ली में नहीं दिखना चाहिए बल्कि अपने-अपने क्षेत्र में जाकर नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने का काम करना चाहिए. सुषमा स्वराज की इस बात का एक अर्थ यह भी निकाला जा रहा है कि संभवत: लोकसभा चुनाव समय के पहले कराने की योजना पर सरकार काम कर रही हो.

लोकसभा का कार्यकाल अगले साल मई तक है और सब कुछ समय से होता है तो लोकसभा चुनाव अगले साल मार्च-अप्रैल में होंगे. लेकिन सुषमा स्वराज के बयान के आधार पर कुछ लोग कयास लगा रहे हैं कि चुनाव कुछ महीने पहले भी हो सकते हैं. सवाल उठता है कि क्या ऐसा वास्तव में हो सकता है.

भाजपा के अंदर जो बातचीत चल रही है, उससे तो यही लग रहा है कि लोकसभा चुनाव अपने तय समय यानी अगले साल मार्च-अप्रैल में ही होंगे. दरअसल, इस साल फरवरी-मार्च तक भाजपा में यह बात चल रही थी कि चुनाव अक्टूबर-नवंबर में कराए जा सकते हैं. लेकिन ऐसा तब होना था जब विपक्ष के साथ सरकार की यह सहमति बन जाती कि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराए जाएं. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. ऐसे में जल्दी चुनाव पर पार्टी के अंदर होने वाली चर्चा बंद हो गई.

आम तौर पर लोकसभा चुनाव से संबंधित तैयार करने के लिए चुनाव आयोग को भी चार महीने का वक्त चाहिए होता है. अगर सुषमा स्वराज की बातों के आधार पर यह मानें कि सरकार जल्दी चुनाव कराने की योजना पर काम कर रही है तो चुनाव आयोग की तैयारी जोर-शोर से चल रही होती. लेकिन आयोग की ओर से अभी इस तरह की कोई जानकारी नहीं आई है.

हालांकि, जब पार्टी के अंदर यह चर्चा बंद हुई कि जल्दी चुनाव नहीं कराए जाएंगे तो यह चर्चा भी चली कि अगर लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराने को लेकर विपक्ष से सहमति से बनती है तो मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ा दिया जाए. लेकिन यह बात भी बहुत आगे इसलिए नहीं बढ़ पाई कि कांग्रेस और कई दूसरी क्षेत्रीय पार्टियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के प्रस्ताव पर तैयार नहीं हैं. इसके अलावा भाजपा के कुछ नेताओं को यह भी लगता था कि लोकसभा का कार्यकाल बढ़ाने के लिए विपक्ष को तैयार कराना आसान काम नहीं होगा.

कुल मिलाकर सुषमा स्वराज के बयान के बावजूद अभी की स्थिति में तो लोकसभा चुनाव अपने तय समय पर ही होते दिख रहे हैं.