भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने न्यायिक तंत्र पर की गई एक टिप्पणी में कहा है कि सिस्टम की आलोचना करना बहुत आसान है, लेकिन इसमें सुधार करना कठिन. मुख्य न्यायाधीश स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सुप्रीम कोर्ट में आयोजित एक समारोह में बोल रहे थे. बार एंड बेंच के मुताबिक इस दौरान दीपक मिश्रा ने कहा है, ‘सिस्टम की आलोचना करना, उस पर हमला करना और उसे नष्ट कर देना आसान है, लेकिन उसे काम करने योग्य बनाना एक चुनौती है.’ उन्होंने आगे कहा कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से परे ठोस और सकारात्मक सुधार पूरी जिम्मेदारी से होने चाहिए.

इसी कार्यक्रम में बोलते हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में भीड़ बने रहने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज्यादा खामियाजा महिला वकीलों को उठाना पड़ता है. अटॉर्नी जनरल के मुताबिक, ‘लाइव स्ट्रीमिंग इसका हल हो सकता है, फिलहाल ये लंबित है लेकिन इसके शुरू होने पर कुछ राहत मिल सकती है.’ उन्होंने आगे कहा कि अगले स्वतंत्रता दिवस तक इस तरह के माहौल से छुटकारा मिल जाने की उम्मीद है.