समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रमुख मुलायम सिंह यादव अपने ही दल के लिए असहज स्थिति पैदा करते दिख रहे हैं. ख़बरों के मुताबिक उन्होंने 10 जुलाई 2015 के एक मामले में स्वीकार कर लिया है कि उन्होंने राज्य के वरिष्ठ आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी अमिताभ ठाकुर को फोन पर धमकी दी थी. यह तब की घटना है जब उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार थी और मुलायम सिंह के पुत्र अखिलेश मुख्यमंत्री थे.

हालांकि ख़बरों में यह भी बताया गया है कि मुलायम सिंह ने अपनी आवाज़ का नमूना देने से साफ इंकार कर दिया है. इससे ऑडियो क्लिप में मौज़ूद आवाज़ की तस्दीक़ नहीं हो पाई है. अलबत्ता सीजेएम (मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) लखनऊ को सौंपी गई रिपोर्ट में जांच अधिकारी अनिल कुमार ने ख़ास तौर पर उल्लेख किया है कि वे ख़ुद मुलायम सिंह के आवास पर गए थे. उस वक़्त मुलायम सिंह ने माना था कि उन्होंने ‘कुछ चीजें समझाने के लिए’ आईपीएस ठाकुर को फोन किया था.

ग़ौरतलब है कि अमिताभ ठाकुर ने ख़ुद 2015 में मुलायम सिंह के ख़िलाफ़ मामला दर्ज़ कराया था. इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि सपा प्रमुख (उस वक्त पार्टी की कमान मुलायम के हाथ में ही थी) ने फोन पर उन्हें धमकी दी. साथ ही उन्होंने फोन पर हुई इस बातचीत का ऑडियो टेप भी पुलिस को सौंपा था. हालांकि इसके बाद उन्हें इसी मामले में अदालत का रुख़ करना पड़ा क्योंकि लखनऊ के हज़रतगंज पुलिस थाने ने जांच के बिना ही अक्टूबर-2015 में मामला बंद कर दिया था.

अदालत ने जब जांच का आदेश दिया तब भी पुलिस ने मुलायम सिंह को क्लीन चिट दे दी थी. लेकिन अदालत ने अगस्त-2016 में पुलिस की यह जांच रिपोर्ट ख़ारिज़ कर फिर से केस खोलने का आदेश दिया था. साथ ही ऑडियो टेप में दर्ज़ आवाज़ों की फॉरेन्सिक लैब में जांच कराने का भी निर्देश दिया था. इसके बाद मामला कुछ आगे बढ़ सका था.