प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को यानी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बीते चार साल की तरह लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया था. बतौर प्रधानमंत्री यह स्वतंत्रता दिवस पर उनका अंतिम संबोधन था. वे अगले साल यहां से संबोधन दें पाएंगे या नहीं, यह उससे पहले होने वाले लोक सभा चुनावों पर निर्भर करेगा.

लेकिन इस अंतिम संबोधन के बाद वे सोशल मीडिया पर अपने भाषण से इतर एक अलग ही वजह से ट्रोलिंग का शिकार हो गए हैं. दावा किया जा रहा है कि जब लाल क़िले पर राष्ट्रगान बज रहा था उस दौरान प्रधानमंत्री सीधे खड़े रहने के बजाय पानी पी रहे थे. फेसबुक और ट्विटर पर उस पल का वीडियो भी शेयर किया जा रहा है जिसे नीचे देखा जा सकता है.

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इस वीडियो में नरेंद्र मोदी पानी पीते देखे जा सकते हैं और राष्ट्रगान के शब्द सुने जा सकते हैं. जिस समय ‘...पंजाब सिंध गुजरात मराठा, द्राविड़ उत्कल बंग’ वाली पंक्तियां आती हैं, यहां उसी समय प्रधानमंत्री को पानी पीते दिखाया गया है.

हालांकि असल में ऐसा नहीं हुआ था. यह सब एडिटिंग के ज़रिए घटना की टाइमिंग से छेड़छाड़ करने का खेल है. इस घटना की सच्चाई समझने के लिए असली वीडियो नीचे दिया गया है. इसमें दो बार राष्ट्रगान गाया गया है. एक बार तब जब प्रधानमंत्री ने झंडा फहराया, और दूसरी बार (1 घंटा 45 सेकंड पर) उनके भाषण ख़त्म करने के बाद.

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दूसरी बार राष्ट्रगान बजने से कुछ सेकंड पहले प्रधानमंत्री यहां ‘वंदे मातरम्’ का नारा लगाते हुए देखे जा सकते हैं. उनके साथ कार्यक्रम में शामिल हुए बच्चे भी वंदे मातरम् बोलते दिख रहे हैं. अंतिम बार वंदे मातरम् बोलने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री पानी का गिलास उठाते हैं, लेकिन उसी क्षण राष्ट्रगान बजने लगता है. उसे सुनकर प्रधानमंत्री तुरंत गिलास रख देते हैं और सीधे खड़े हो जाते हैं. यह सब भी संयोग से ही हुआ था, लेकिन यह साफ है कि सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा झूठा है.