केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने मध्य प्रदेश के आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी मयंक जैन को समय से पहले सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) दे दी है. मध्य प्रदेश सरकार की सिफारिश पर यह कार्रवाई की गई.

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मयंक 1995 बैच के आईपीएस हैं. उनके ख़िलाफ़ चार साल पहले लोकायुक्त की जांच बिठाई गई थी. उस जांच के तहत जैन के ठिकानों पर जब छापे मारे गए तो करोड़ों रुपए की भ्रष्टाचार की कमाई का पता चला था. साथ में यह भी पाया गया कि उन्होंने इन्हीं पैसों से तमाम संपत्तियां भी बना रखी हैं. हालांकि बताया यह जा रहा है कि जैन को उनके कार्यप्रदर्शन में कमतर पाए जाने की वज़ह से नौकरी से हटाया गया है. इसका उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से कोई लेना-देना नहीं है.

राज्य प्रशासन से जुड़े एक सूत्र ने बताया, ‘साल 1958 में बने अखिल भारतीय सेवाओं के नियम-16 के उपनियम-6 के तहत यह कार्रवाई की गई है. यह नियम अखिल भारतीय सेवाओं के अफसरों के कार्यप्रदर्शन (वर्क परफॉरमेंस) से जुड़ा हुआ है. इस नियम के तहत जो अफसर 20 साल की सेवा या 50 साल की उम्र पूरी कर चुके हैं उनके ख़िलाफ़ इस तरह की कार्रवाई की जा सकती है. जहां तक भ्रष्टाचार का मामला है तो यह न्यायिक प्रक्रिया इस बारे में अपना काम करेगी.’ जैन को हटाने का पत्र 13 अगस्त को जारी हुआ है.

भोपाल, उज्जैन, इंदौर और रीव जैसे संभागों के पुलिस महानिरीक्षक रह चुके जैन को हटाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र से इसी साल तीन मार्च को सिफारिश की थी. जिस वक़्त लोकायुक्त पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ जांच शुरू की और उनके ठिकानों पर छापे मारे तब वे सामुदायिक पुलिसिंग के महानिरीक्षक के तौर पर भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय में पदस्थ थे. पेशे से चिकित्सक जैन ने अब तक इस कार्रवाई पर अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. अख़बार के संपर्क करने पर भी उन्होंने ज़वाब नहीं दिया.