होली पर अक्षय कुमार की फिल्म ‘केसरी’ रिलीज हुई थी तो बीते महीने स्वतंत्रता दिवस पर वे ‘मिशन मंगल’ लेकर आए. दोनों ही फिल्मों की रिलीज के दौरान सोशल मीडिया पर देशभक्ति का खासा माहौल बनता दिखा. वैसे तो आजाद भारत में देशभक्ति की थीम और सरोकारी मुद्दों पर शुरुआत से ही फिल्में बनती रही हैं लेकिन बीते कुछ सालों से अक्षय कुमार ही लगातार इस तरह की फिल्मों के नायक के तौर पर परदे पर दिखाई देते रहे हैं. फिर भी, उनसे पहले अगर कोई एक नाम जो ऐसी फिल्मों से सबसे ज्यादा जोड़ा जाता है, वो है - मनोज कुमार. यहां तक कि उन्हें इन फिल्मों से जुड़ाव के कारण भारत कुमार उपनाम भी दिया गया है. वहीं उन्होंने अपनी कुछ सबसे चर्चित फिल्मों में भारत कुमार नाम से किरदार भी निभाए हैं. हालांकि अक्षय कुमार की किसी फिल्म में अब तक उनके किरदार का यह नाम नहीं रहा फिर भी अक्सर यह बात उठती रहती है कि क्या अक्षय कुमार हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के नए ‘भारत कुमार’ हैं.

एक बार जब यही सवाल अक्षय कुमार से पूछा गया तो उन्होंने ढेर सारी मगर बनावटी विनम्रता ओढ़ते हुए यह मानने से इनकार कर दिया कि मनोज कुमार जैसी बड़ी शख्सियत से उनकी कोई तुलना हो सकती है. इसके उलट जब असली भारत कुमार यानी मनोज कुमार के सामने यह सवाल उठाया गया तो उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि उनकी तुलना नए जमाने के हैंडसम और टैलेंटेड अभिनेता से की जाती है. इसके अलावा भी मनोज कुमार समय-समय पर अक्षय की फिल्मों की तारीफ करते रहे हैं. बीते साल टॉयलेट-एक प्रेम कथा के लिए उन्होंने खिलाड़ी कुमार को एक वीडियो के जरिए बधाई भी दी थी.

मनोज कुमार और अक्षय कुमार के बीच कुछ दिलचस्प समानताओं पर गौर करें तो न सिर्फ उनके स्क्रीन नेम एक जैसे हैं बल्कि उनके असली नामों में भी एक शब्द कॉमन है. मनोज कुमार का असली नाम हरिकृष्ण गिरि गोस्वामी है, वहीं अक्षय कुमार का असली नाम है राजीव हरिओम भाटिया. इसके अलावा ये दोनों ही कलाकार देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किए जा चुके हैं और दोनों ने ही फिल्मों में काम करने की शुरुआत कैमिओ भूमिकाओं से की थी. 1957 में रिलीज हुई ‘फैशन’ के एक देशभक्ति गीत ‘धरती की गोद में’ में मनोज कुमार पहली बार स्क्रीन पर दिखाई दिए थे तो अक्षय कुमार ने साल 1990 में रिलीज हुई फिल्म ‘आज’ के एक दृश्य में मार्शल आर्ट इंस्ट्रक्टर की भूमिका निभाई थी.

इस शुरुआत के बाद मनोज कुमार ने ‘हरियाली और रास्ता’, ‘बनारसी ठग’, ‘गृहस्थी’, ‘वो कौन थी’ जैसी कुछ सामाजिक तो कुछ मसाला फिल्में कीं और बतौर एक्टर एक पहचान बनने के बाद देशभक्ति फिल्मों की तरफ मुड़ गए. अक्षय कुमार के मामले में उनका शुरुआती दौर खिलाड़ी सीरीज की फिल्मों का रहा. इसमें उन्होंने ‘सैनिक’ और ‘अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो’ जैसी फिल्में तो की थीं, लेकिन वे देशभक्ति के तड़के वाली रूटीन मसाला फिल्में थीं जो बॉक्स ऑफिस पर सफल भी नहीं रहीं. हां, इस दौरान अक्षय कुमार टीवी कमर्शियल्स में जरूर देश को बचाने वाले योद्धा के रूप में नजर आते रहे. हरक्युलिस साइकिल और एवरेडी बैटरी के विज्ञापन इसका उदाहरण हैं. बीच में एक दौर वह भी रहा जब अक्षय एक्शन फिल्मों से किनारा कर निपट मसाला या कॉमेडी फिल्में जैसे – ‘अजनबी’, ‘अंदाज’, ‘हेराफेरी’, ‘गरम-मसाला’ वगैरह करते नजर आए थे.

बीते कुछ सालों में अक्षय ने एक बार फिर अपनी दिशा बदली है. साल में करीब तीन फिल्में करने वाले अक्षय कुमार 15 अगस्त और 26 जनवरी की तारीख अपनी फिल्मों के लिए बुक ही रखते हैं. साल 2018 की बात करें तो उनकी फिल्म ‘पैडमैन’ को 26 जनवरी को ही रिलीज होना था, लेकिन ‘पद्मावत’ की रिलीज का समर्थन करते हुए उन्होंने इसकी रिलीज दो हफ्तों के लिए टाल दी थी. वहीं उस साल 15 अगस्त को उनकी फिल्म ‘गोल्ड’ रिलीज हुई थी. यह सिलसिला साल 2014 में आई ‘हॉलिडे-अ सोल्जर इज नेवर ऑफ ड्यूटी’ से शुरू हुआ था और अब इस सीरीज में ‘बेबी’, ‘गब्बर इज बैक’, ‘एयरलिफ्ट’, ‘रुस्तम’, ‘टॉयलेट-एक प्रेमकथा’ जैसी फिल्में शामिल हैं.

मनोज कुमार और अक्षय कुमार की फिल्मों के विषयों की तुलना करें तो मनोज कुमार की फिल्मों में जहां पार्टीशन, भारत-चीन या भारत-पाक युद्ध पृष्ठभूमि में रहा है तो वहीं अक्षय कुमार की फिल्मों में आतंकवाद, भ्रष्टाचार या कोई ऐतिहासिक घटना मुख्य विषय हुआ करती है. हां, लेकिन सामाजिक संदेश देना दोनों की ही फिल्मों के मुख्य उद्देश्य कहे जा सकते हैं. अगर मनोज कुमार की ‘पूरब और पश्चिम’ ‘वो कौन थी’ और ‘रोटी कपड़ा और मकान’ इसका उदाहरण हैं तो अक्षय कुमार के खाते में ‘पैडमैन’ और ‘टॉयलेट-एक प्रेमकथा’ आती हैं.

मनोज कुमार के बारे में एक बात यह कही जाती है कि वे अपनी फिल्मों से ही सबकुछ साधते नजर आते थे. जैसे कि वे पहले ऐसे फिल्मकार थे जिन्होंने हिंदी फिल्मों में पाकिस्तानी कलाकारों को काम करने का मौका दिया था. साल 1989 में रिलीज हुई उनकी एक फिल्म में उन्होंने मोहम्मद अली और ज़ेबा नाम के पाकिस्तानी सितारों को अहम भूमिकाएं निभाने का मौका दिया था. अक्षय कुमार की बात करें तो वे अपनी फिल्मों के साथ-साथ इनसे इतर भी जागरुकता अभियान चलाते देखे जा सकते हैं. पैडमैन के प्रमोशन के दौरान सोशल मीडिया पर वे कई तरह से सैनिटरी पैड्स को लेकर जागरूकता फैलाने की कोशिश करते दिखे थे. इसके अलावा पिछले दिनों वे खेती-किसानी की योजनाओं और ट्रैफिक नियम पालन करने से जुड़े सरकारी विज्ञापनों में देखे गए.

बेशक, मनोज कुमार और अक्षय कुमार की फिल्मों में समय और परिस्थितियों के चलते काफी अंतर देखने को मिलता है, फिर भी सीमित अभिनय क्षमता होने के बावजूद इन दोनों कलाकारों ने बॉलीवुड में एक नई शैली की फिल्मोग्राफी का रास्ता तो तैयार किया ही है. इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि इनकी देशभक्ति पड़ोसी देशों से नफरत और हिंसा को प्लेटफॉर्म देकर पैसे कमाने का मौका भर नहीं है. इसकी शुरूआत मनोज कुमार ने की थी और अक्षय कुमार सधे कदमों से इस पर चलकर एक नए पड़ाव तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. अपने करियर को दिए इस ट्विस्ट और सार्वजनिक व्यवहार से मनोज कुमार की सोने सी कीमती विरासत के इकलौते और खरे वारिस वही लगते हैं. वे चाहें या न चाहें उनकी तुलना मनोज कुमार से होती रहेगी.