मध्य प्रदेश और राजस्थान की मतदाता सूचियों में फर्जी मतदाताओं के नाम शामिल होने से जुड़ी कांग्रेस नेताओं की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब दाखिल करने को कहा है. इसके साथ ही जस्टिस एके सिकरी और अशोक भूषण की खंडपीठ ने इस मामले में दोनों राज्य के चुनाव आयोगों को भी नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट में मध्य प्रदेश से जुड़े मामले पर कांग्रेस नेता कमलनाथ और राजस्थान से जुड़े मामले पर सचिन पायलट ने याचिका दायर की है. इनकी पैरवी करते हुए वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि कमलनाथ द्वारा खुद के खर्चे से करवाए एक सर्वे में मध्य प्रदेश की मतदाता सूची में 60 लाख फर्जी मतदाता पाए गए. वहीं राजस्थान की मतदाता सूची में भी 42 लाख फर्जी मतदाताओं के नाम शामिल हैं.

कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष कमलनाथ ने इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट से चुनाव आयोग को यह निर्देश देने की मांग भी की है कि चुनाव अधिकारी सभी विधानसभा क्षेत्रों के 10 फीसदी मतदान केंद्रों में जाएं और ईवीएम के वोटों का वीवीपीएटी की पर्चियों से मिलान करें. इसके पहले जून में चुनाव आयोग ने लोक सभा और विधान सभा दोनों चुनावों में पांच फीसदी मतदान केंद्रों में वीवीपीएटी पर्चियों के सत्यापन की बात कही थी. इसके साथ आयोग का यह भी कहना था कि चुनाव अधिकारी ज्यादा से ज्यादा 14 मतदान केंद्रों पर ही वीवीपीएटी पर्चियों की गिनती करेंगे.

वीवीपीएटी मशीन से मतदान के बाद पार्टी के चुनाव चिह्न वाली एक पर्ची निकलती है, जिसे देखकर मतदाता यह जांच सकता है कि उसने जिस दल के प्रत्याशी को वोट दिया है, वह उसे मिला है या नहीं. इसके बाद यह पर्ची एक डिब्बे में जमा हो जाती है, जिसका इस्तेमाल चुनाव संबंधी विवादों को निपटाने में किया जा सकता है.