अगले लोकसभा चुनावों को लेकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने सुनियोजित ढंग से तैयारियां शुरू कर दी हैं. भाजपा राजधानी दिल्ली के अपने पुराने मुख्यालय 11 अशोक रोड को अगले चुनावों के लिए वॉर रूम के तौर पर विकसित कर रही है. यहां से न सिर्फ पूरे देश के लिए पार्टी के चुनाव अभियान की तैयारी की जाएगी बल्कि चुनाव अभियान पर निगरानी भी रखी जाएगी.

अगले लोकसभा चुनावों को लेकर जो तैयारियां शुरू हुई हैं, उनके मुताबिक इस केंद्रीय वॉर रूम के जरिए पूरे देश में एक रणनीतिक ढांचा खड़ा किया जाएगा. भाजपा की योजना हर राज्य में एक वॉर रूम तैयार करने की है. इन्हें केंद्रीय वॉर रूम से जोड़ा जाएगा. राज्यों के केंद्रों से दिल्ली के मुख्य केंद्र के बीच बेहतर तालमेल से पूरा चुनाव अभियान खड़ा करने की योजना पर काम चल रहा है.

इन तैयारियों से जुड़े भाजपा के एक पदाधिकारी बताते हैं, ‘केंद्रीय वॉर रूम पार्टी के चुनाव अभियान के लिए मुख्यालय का काम करेगा. यहां से न सिर्फ रणनीतियां तय होंगी और प्रचार का ढंग तैयार होगा बल्कि एक बेहतर समन्वय स्थापित करने का काम भी किया जाएगा.’ वे आगे जोड़ते हैं, ‘कई बार देखा गया है कि राज्य इकाइयों या लोकसभा सीट के स्तर के पार्टी कार्यकर्ताओं में किसी मुद्दे को लेकर भ्रम की स्थिति रहती है. ऐसे में पार्टी इस बार एक ऐसा तंत्र विकसित करने की कोशिश कर रही है जिसके जरिए नीचे के स्तर के पार्टी कार्यकर्ता केंद्रीय वार रूम का इस्तेमाल मार्गदर्शन और स्पष्टता के लिए कर सकें.’

इस कवायद के तहत राज्य स्तरीय केंद्रों को बूथ स्तर के आंकड़े जमा करने को कहा गया है. केंद्रीय वॉर रूम इन आंकड़ों और नीचे के स्तर से मिलने वाली जानकारियों के हिसाब से मुद्दों की पहचान और उन्हें उठाने के तौर-तरीकों की रणनीति बनाएगा. भाजपा पदाधिकारी कहते हैं, ‘केंद्रीय वॉर रूम के निर्णयों के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन का काम प्रदेश वॉर रूम के जरिए ही होगा. इन्हें ही संसदीय क्षेत्रों के हिसाब से न सिर्फ क्रियान्वयन का काम करना होगा बल्कि नीचे के स्तर की जानकारियां और आंकड़े केंद्रीय कार्यालय को देने होंगे ताकि इनकी मदद से केंद्रीय वॉर रूम रणनीतियां बना सके.’

जिला स्तर पर भी इस तरह के केंद्र बनाने की योजना पर पार्टी काम कर रही है. हालांकि, इसे लेकर अभी पूरी स्पष्टता नहीं है. एक प्रस्ताव यह भी चल रहा है कि प्रदेश कार्यालय में ही जिलों के हिसाब से एक प्रकोष्ठ बनाया जाए और इनके जरिए उन जिलों से संबंधित जानकारियां इकट्ठा की जाएं. जिला केंद्रों में औसतन दो से तीन बूथ के हर वोटर को फोन करने के लिए एक व्यक्ति नियुक्त करने की भी योजना है. इसका काम यह होगा कि वह हर व्यक्ति को सीधे फोन करके उससे भाजपा के पक्ष में मतदान करने को कहे. इन केंद्रों में काम करने वालों में कुछ पार्टी के प्रशिक्षित कार्यकर्ता होंगे तो कुछ आंकड़ों का विश्लेषण करके रणनीतियां बनाने वाले विशुद्ध पेशेवर.

पिछले कुछ समय से पार्टी ने कुछ चुने हुए कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण का अभियान चला रखा है. पार्टी की इनमें से कुछ कार्यकर्ताओं को इस वॉर रूम में जिम्मेदारी देने की योजना है. इसके अलावा डेटा विश्लेषण और इसके आधार पर रणनीतियां बनाने वाले कुछ लोगों को बाजार से अच्छे पैसे देकर इन केंद्रों में रखने की योजना भी बनाई जा रही है.

यह पूछे जाने पर कि इन केंद्रों की सुविधाओं का लाभ सिर्फ भाजपा उम्मीदवारों को मिलेगा या फिर भाजपा के सहयोगी दलों के उम्मीदवारों को भी, पार्टी पदाधिकारी कहते हैं, ‘हम व्यापक तैयारी कर रहे हैं. अगर किसी सहयोगी दल ने हमसे इस बारे में मदद लेने की इच्छा दिखाई तो इस पर पार्टी के शीर्ष नेता विचार करेंगे और निर्णय लेंगे.’

भाजपा पिछले कई चुनावों से वॉर रूम बनाकर चुनाव लड़ती रही है. अटल बिहारी वाजपेयी के दौर में भी प्रमोद महाजन के नेतृत्व में वॉर रूम काम करता था. 2009 में जब लालकृष्ण आडवाणी की अगुवाई में पार्टी चुनाव लड़ी तो उस वक्त भी पार्टी ने वॉर रूम बनाया था. 2014 में भी दिल्ली में पार्टी का एक वॉर रूम था, लेकिन कहा जाता है कि असल वॉर रूम गुजरात की राजधानी गांधीनगर से काम कर रहा था क्योंकि तब के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री थे और मौजूदा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह उस वक्त इतने ताकतवर नहीं थे कि दिल्ली से वॉर रूम चलाने की पहल करते.

2014 में नरेंद्र मोदी का वॉर रूम चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर संभाल रहे थे. इस बार भी चर्चा है कि मोदी से अलग हुए प्रशांत किशोर एक बार फिर से उनका काम संभाल सकते हैं. पार्टी के नए वॉर रूम में प्रशांत किशोर की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर भाजपा का कोई भी नेता अनौपचारिक तौर पर भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है. कुछ लोग यह कयास लगा रहे हैं कि इन चुनावी रणनीतिक केंद्रों की जिस तरह की रूपरेखा तैयार की गई है, वह प्रशांत किशोर के दिमाग की ही उपज हो सकती है.