भारतीय उपमहाद्वीप में नारियल के तेल का इस्तेमाल सदियों से किया जा रहा है. बालों की मजबूती के लिहाज से इसका बड़ा महत्व माना जाता है. इसका इस्तेमाल खाना बनाने के लिए भी होता है. आहार व स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी नारियल के तेल के इस्तेमाल की सलाह देते हैं. लेकिन हार्वर्ड की एक प्रोफेसर ने एक वीडियो के जरिए नारियल के तेल को सेहत के लिए खतरनाक बताते हुए इसे ‘खालिस जहर’ करार दिया है. हार्वर्ड टीएच चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की प्रोफेसर कैरिन मिशेल्स ने कहा कि नारियल का तेल खाने की सबसे खराब चीजों में से एक है.

वीडियो में कैरिन ने नारियल के तेल में शामिल संतृप्त वसा (सैचुरेटेड फैट) पर सवाल उठाया है जिसे खराब कॉलेस्टेरॉल से जोड़ा जा सकता है. हालांकि सैचुरेटेड फैट से गिनाए जाने नुकसानों पर लंबे समय से सवाल खड़े किए जाते रहे हैं. आम तौर पर माना जाता है कि धूम्रपान और आनुवंशिकी जैसे कारणों के चलते हृदय गति रुकने और दिल का दौरा पड़ने की संभावना ज्यादा रहती है. लेकिन प्रोफेसर कैरिन ने नारियल के तेल में शामिल कैलोरी पर चिंता व्यक्त की है. उनके मुताबिक एक चम्मच नारियल के तेल में 117 कैलोरी होती है और असंतुलित तरीके से इस्तेमाल करने पर यह नुकसानदेह हो सकता है.

लेकिन ऐसा तो अधिकतर तेलों के साथ है. यही वजह है कि कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने प्रोफेसर कैरिन के दावों पर सवाल खड़े किए हैं. एनडीटीवी के मुताबिक उनका कहना है कि उन्होंने कभी भी नारियल के तेल के नुकसानदेह होने की बात नहीं सुनी.

जानी-मानी स्वास्थ्य विशेषज्ञ रुजुता दिवेकर ने इंस्टाग्राम पर बताया कि खाने की किसी चीज को पहले अच्छा और बाद में खराब बताना खाने और वजन कम करने से जुड़ी इंडस्ट्री की मार्केटिंग रणनीति का हिस्सा है. रुजुता ने कहा, ‘नारियल का तेल इस कड़ी में नया नाम है. सही बात यह है कि अगर नारियल तेल हमारे यहां लंबे वक्त से इस्तेमाल हो रहा है और इसके कई इस्तेमाल हैं तो यह बहुत अच्छा खाद्य पदार्थ है.’

पिछले साल अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) ने रिपोर्ट दी थी कि नारियल तेल के इस्तेमाल से खराब कॉलेस्टेरॉल बढ़ता है जिससे हृदय संबंधी बीमारियां हो सकती हैं. इस पर रुजुता कहती हैं कि यह देखा जाना चाहिए कि एएचए जैसी संस्थानों को पैसा कौन देता है. क्या इन्हें फूड कॉर्पोरेशन और दवाई कंपनियों से पैसा मिलता है? उन्होंने कहा, ‘इसलिए हमें इस तरह के दावों पर यकीन करने से पहले संदेह करना चाहिए और सलाह लेनी चाहिए.’

रुजुता की तरह हेल्थ कोच ल्यूक कोतिन्हो भी कुछ ऐसी ही राय रखते हैं. उन्होंने फेसबुक पर लिखा है, ‘किसी भी तेल को जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने, रिफाइन करने, लकड़ी से मथने और ठंडा रखने से हृदय को नुकसान हो सकता है. मुझे लगता है कि डॉक्टर और दवाई विक्रेता इस बात से डरे हुए हैं कि सही मात्रा में नारियल तेल के इस्तेमाल से थाइरॉइड ग्रंथि की कम सक्रियता की समस्या दूर होती है, लीवर एन्जाइम्स में बढ़ोतरी होती है, शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ती है और अन्य कई फायदे होते हैं.’ ल्यूक ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति असंतुलित तरीके से खाने में तेल का इस्तेमाल करेगा तो उसके नुकसान होंगे ही.

एक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ नमामि अग्रवाल ने कहा कि वे हमेशा अपने मरीजों को नारियल का तेल इस्तेमाल करने की सलाह देती हैं. नमामि बताती हैं, ‘नारियल तेल के बहुत सारे फायदे हैं. इसमें शामिल ट्राइग्लिसराइड्स दिल और पूरे शरीर के लिए फायदेमंद हैं. मिरगी के इलाज में भी नारियल तेल लाभदायक है.’ वहीं, प्रोफेसर कैरिन मिशेल्स के दावे पर नमामी कहती हैं, ‘इंटरनेट पर बहुत सारी जानकारियां दी जा रही हैं. हमें गैर-जरूरी जानकारी से दूर रहना चाहिए. उस पर आंख बंद कर सीधे यकीन नहीं करना चाहिए.’