अमेरिका की 59 बड़ी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) ने राष्ट्रपति डाेनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने आव्रजन नीति (इमिग्रेशन पॉलिसी) के तहत एच-1बी वीजा नियमों में बदलाव पर चिंता जताई है.

ख़बर के मुताबिक पत्र लिखने वालों में एपल के टिम कुक, जेपी मॉर्गन के जेमी डीमन, अमेरिकन एयरलाइंस के डग पार्कर और पेप्सिको की इंदिरा नुई का नाम शामिल है. इस पत्र में लिखा है कि सरकार को आव्रजन नीति में ऐसे बदलाव नहीं करना चाहिए जिनकी वजह से अमेरिका में रह रहे हजारों विदेशी कुशल कर्मचारियों को परेशानी हो. ये बदलाव अमेरिका की आर्थिक वृद्धि को कमजोर कर सकते हैं. अाव्रजन नीति के तहत एच-1बी वीजा में बदलाव का मसला पत्र में प्रमुखता से उठाया गया है.

डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनते ही उनके प्रशासन ने नौकरियों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने के लिए आव्रजन नीति में बदलाव किया है. इसका सबसे ज़्यादा असर भारतीय कामगारों पर पड़ रहा है. इसकी वज़ह है कि अमेरिका में संचालित भारतीय ही नहीं, अमेरिकी कंपनियां भी पेशेवर भारतीयों को एच-1बी वीजा पर बुलाकर उनकी सेवाएं लेती हैं. लेकिन वीजा नियमों में बदलाव से अब भारतीय पेशेवरों और उनके बीवी-बच्चों को अमेरिका में रहने में मुश्किल पेश आ रही है. इसी से तमाम कंपनियां भी चिंतित हैं.