2019 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रभावी रणनीतियां तैयार करने के लिहाज से केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी बाकायदा अभी से ही केंद्रीय स्तर पर वॉर रूम बनाकर जुट गई है. भाजपा राजधानी दिल्ली के अपने पुराने मुख्यालय 11 अशोक रोड को अगले चुनावों के लिए वॉर रूम के तौर पर विकसित कर रही है. यहां से न सिर्फ पूरे देश के लिए पार्टी के चुनाव अभियान की तैयारी की जाएगी बल्कि चुनाव अभियान पर निगरानी भी रखी जाएगी.

जहां एक तरफ भाजपा में नए वॉर रूम को लेकर उत्साह की स्थिति है, वहीं इसके उलट कांग्रेस के वाॅर रूम में भ्रम की स्थिति है. वहां काम करने वाले लोगों से बातचीत करने पर पता चलता है कि काम करने वालों में ही स्पष्टता नहीं है कि किस राज्य में किस पार्टी के साथ गठबंधन होगा और कांग्रेस किन-किन सीटों पर चुनाव लड़ेगी. ज्यादातर राज्यों में गठबंधन को लेकर क्षेत्रीय दलों से कांग्रेस के वार्ता किसी नतीजे तक नहीं पहुंची है. इस वजह से सोशल मीडिया पर तो राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर कांग्रेस की टीम मुखर और प्रभावी है, लेकिन स्थानीय मुद्दों को पकड़ने और उन्हें सुनियोजित ढंग से उठाने के मामले में कांग्रेस के वॉर रूम में स्पष्टता नहीं है.

दरअसल, कांग्रेस के वॉर रूम के तौर पर जो कार्यालय काम करता है, वह किसी चुनाव विशेष के लिए नहीं है बल्कि वह पार्टी के लिए स्थायी तौर पर काम करता है. चुनावों के वक्त बस यहां से काम करने वाले लोगों की संख्या बढ़ जाती है. इससे जुड़े कुछ लोगों ने बताया कि पहले इस कार्यालय में काम करने वाले लोगों की संख्या में विस्तार और दूसरे आयामों पर काम बढ़ाने की बात चल रही थी, लेकिन फिलहाल अब इसे लेकर शांति है.

यहां काम करने वाले लोग यह भी बता रहे हैं कि दिव्या स्पंदना के आने के बाद से इस कार्यालय का काम मोटे तौर पर सोशल मीडिया पर पार्टी का प्रचार-प्रसार करने तक सीमित रह गया है. सोशल मीडिया पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की छवि ठीक करने और नरेंद्र मोदी के खिलाफ माहौल बनाने में इस कांग्रेसी वॉर रूम ने काफी हद तक कामयाबी भी पाई है.

इसके बावजूद इस कार्यालय में काम करने वालों को यह लग रहा है कि आने वाले कुछ हफ्तों में और खास तौर पर तब जब भाजपा के वॉर रूम की तैयारियों के बारे में कांग्रेस में भी कानाफूसी शुरू हो गई है, तो कांग्रेस में भी अपने वॉर रूम को दुरुस्त करने की पहल शुरू हो. उनका यह भी कहना है कि अगर समय रहते कांग्रेस ने शुरुआत नहीं की तो जिस तरह से गुजरात में भाजपा विरोधी माहौल होने के बावजूद वहां कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन करके भी सरकार नहीं बना पाई, वही स्थिति आने वाले विधानसभा चुनावों में और 2019 के लोकसभा चुनावों में हो सकती है.

इन लोगों का यह भी कहना है कि इस कार्यालय को मार्गदर्शन देने वाले नेताओं की जो सूची कागज पर बनी है, उसमें पार्टी के तमाम आला नेताओं का नाम है. लेकिन सच्चाई यह है कि यह कार्यालय दिव्या स्पंदना पर ही निर्भर है और एक हद तक रणदीप सुरजेवाला भी इस कार्यालय की गतिविधियों पर नजर रखते हैं. जिस तरह से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पार्टी के वॉर रूम की हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं, उस तरह की भूमिका इस कार्यालय को लेकर राहुल गांधी नहीं निभा रहे.

इस कार्यालय में काम करने वाले एक शख्स ने बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल के कोषाध्यक्ष बनने के बाद एक उम्मीद जगी है कि जिस तरह से अभी से ही भाजपा चुनावी तैयारियों में रणनीतिक ढंग से जुट गई है, वैसी ही पहल अहमद पटेल इस कार्यालय के जरिए कांग्रेस के लिए शुरू कराएं. लेकिन ये तैयारियां कब शुरू होंगी, इस बारे में कोई स्पष्टता इस कार्यालय में काम करने वालों के बीच नहीं है.