पेटीएम भारत की सबसे बड़ी भुगतान सेवा प्रदाता कंपनी है लेकिन नई-नवेली सी. क्योंकि साल 2000 में युवा कारोबारी विजय शेखर शर्मा द्वारा शुरू की गई यह कंपनी अभी कुछेक साल पहले ही ज़्यादा चर्चित हुई है. ख़ास तौर पर जब से डिजिटल लेन-देन का चलन तेज हुआ है. वहीं दूसरी तरफ वारेन बफे हैं, दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी और सबसे सबसे बड़े निवेशक. वे लगभग 75 साल से निवेश के कारोबार में हैं. कहते हैं कि वे जब 13 साल के थे तब से उन्होंने निवेश का कारोबार शुरू कर दिया था और अब दो दिन बाद 30 अगस्त को वे अपनी उम्र के 88 साल पूरे करने वाले हैं. इन दोनों कंपनियों और इनके मालिकों के बीच यह बड़ा सा अंतर आज इसलिए चर्चा का विषय है क्योंकि सुनने में आया है कि बफे की कंपनी जल्द ही पेटीएम में निवेश में कर सकती है.

लाइव मिंट ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि वारेन बफेन की कंपनी बर्कशायर हैथवे इन्कॉरपोरेशन अगले दो से तीन हफ़्ते के भीतर पेटीएम की मालिक वन97 में निवेश कर सकती है. दोनों कंपनियों के बीच इस बाबत बीती फरवरी से बातचीत चल रही है जो अब अंतिम चरण में है. इससे जुड़े दो लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर इसकी पुष्टि की है. यह सौदा अगर होता है कि देश की किसी नई कंपनी (स्टार्ट अप) में बफे का यह पहला निवेश होगा. यह निवेश दो-ढाई हजार करोड़ रुपए का हो सकता है.

हालांकि इस बाबत बर्कशायर हैथवे ने अख़बार को उसके मेल का कोई ज़वाब नहीं दिया. पेटीएम के प्रवक्ता ने भी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. ग़ौरतलब है कि पेटीएम का कारोबार भारत में तेजी से बढ़ रहा है. कंपनी का दावा है कि उसके जरिए हर रोज में देश में 280 अरब रुपए का लेन-देन किया जा रहा है. इसके बढ़ते कारोबार का ही असर है कि कंपनी में जापान के सॉफ़्टबैंक और चीन के अलीबाबा समूहाें तथा एएनटी फायनेंशियल ने अच्छा-खासा निवेश किया था.