अडानी समूह ने मंगलवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए समूह की कुछ फर्मों के खिलाफ जारी किए गए लेटर्स रोगेटरी (एलआर) को रद्द करने की अपील की है. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक ये एलआर राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने इन फर्मों द्वारा इंडोनेशिया से आयात किए गए कोयले की कीमत को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए जाने (ओवर इनवॉयसिंग) के मामले में जारी किए हैं. एलआर एक औपचारिक अनुरोध पत्र होता है जो किसी आरोपित कंपनी की जांच के लिए दूसरे देश से न्यायिक सहायता मांगने के लिए दिया जाता है.

अडानी समूह ने यह कदम उसकी कंपनी अडानी ग्लोबल के खिलाफ सिंगापुर हाई कोर्ट के फैसले के बाद उठाया है. वहां की एक निचली अदालत ने अडानी समूह की कुछ कंपनियों के अलावा कुछ शिपिंग कंपनियों और बैंकों से कहा था कि वे इस मामले में जरूरी दस्तावेज उसके पास जमा कराएं. अदालत ने यह कदम डीआरई से एलआर मिलने के बाद उठाया था. इसके खिलाफ अडानी ग्लोबल सिंगापुर हाई कोर्ट में गई थी. लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली थी. अखबार के मुताबिक अडानी समूह से उसे इस मामले पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.

मार्च, 2016 में डीआरआई ने दावा किया था कि बिजली उत्पादन क्षेत्र में सक्रिय कई कंपनियों द्वारा इंडोनेशिया से आयात किये जा रहे कोयले की ओवर इनवॉयसिंग की गई. जानकारों के मुताबिक इस तरह से न सिर्फ कालेधन को सफेद बनाया जाता है बल्कि सरकारों पर बिजली के दाम बढ़ाने का दबाव भी बनाया जाता है. कई रिपोर्टों में इसे 30 हजार करोड़ का घोटाला बताया गया है. अडानी समूह के अलावा डीआरआई इस मामले में अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) और एस्सार ग्रुप की दो फर्मों के खिलाफ भी जांच कर रहा है. इससे पहले तीन सरकारी स्वामित्व वाले बैंकों ने गोपनीयता का हवाला देते हुए कोयले के आयात को लेकर इन बिजली कंपनियों द्वारा किए गए लेन-देन के संबंध में डीआरआई को जानकारी देने से मना कर दिया था. इसके बाद राजस्व सचिव हंसमुख अधिया ने बैंकों से जांच में सहयोग करने के लिए कहा था.