मद्रास हाईकोर्ट चाहता है कि देश के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल नाकाें पर विशिष्ट लोगों (वीआईपी) और अदालतों के मौज़ूदा जजों के लिए अलग से लेन बनाई जाए. उच्च अदालत ने इस बाबत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को संदेश भेजा है.

ख़बरों के मुताबिक एक मामले की सुनवाई के दौरान मद्रास हाईकोर्ट के जज एचजी रमेश और एमवी रवींद्रन की खंडपीठ ने कहा है कि टोल नाकों पर जजों सहित सभी विशिष्ट लोगों को काफी देर तक इंतज़ार करना पड़ा है. फिर अपनी बारी आने पर उन्हें पहचान पत्र भी दिखाना पड़ता है. यह बेहद असहज और अपमानजनक स्थिति होती है. इसलिए पूरे देश में टोल नाकाें पर विशिष्ट लोगों (वीआईपी) और अदालतों के मौज़ूदा जजों के लिए अलग से लेन बनाने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.

अदालत ने कहा कि इस बाबत जितनी जल्दी हो एचएचएआई टोल संग्राहकाें को नोटिस जारी करे. उन्हें विशिष्ट लोगों के लिए अलग लेन बनाने की ताक़ीद करे. साथ में यह भी सुनिश्चित करे कि विशिष्ट लोगों और जजाें के अलावा कोई और इन लेनों से न निकले. अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके सुझाव को आदेश माना जाए और यह पूरे देश में लागू हो. ऐसा नहीं किया गया और समस्या बनी रही तो अदालत ज़िम्मेदारों को कारण बताओ नोटिस जारी करेगी. अदालत के आदेश की अवहेलना को गंभीरता से लिया जाएगा.