चालू वित्तीय वर्ष (2018-19) में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के आंकड़े मोदी सरकार के लिए राहत लेकर आए हैं. इसके मुताबिक इस दौरान देश की विकास दर 8.2 फीसदी रही. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 5.59 फीसदी था. यह पिछले दो सालों के दौरान किसी भी तिमाही में विकास दर का सबसे ऊंचा आंकड़ा है. वहीं, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया के लगातार कमजोर होने की खबर भी अखबारों की प्रमुख सुर्खियों में शामिल है. गुरुवार को भारतीय मुद्रा 70.95 रुपये प्रति डॉलर की कीमत पर खुली और कुछ ही देर में 71 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गई. यह पहली बार है जब रुपये ने 71 का स्तर छुआ है.

हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दो, बंदर नुकसान नहीं पहुंचाएंगे : आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने मथुरा-वृंदावन में बंदरों से सुरक्षा के लिए लोगों को हनुमान चालीसा पढ़ने की सलाह दी है. नवभारत टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा, ‘मथुरा-वृंदावन में बंदरों की बढ़ती हुई संख्या यहां के लोगों के लिए एक बड़ी मुसीबत बनी हुई है. इस समस्या से निजात के लिए हमेशा सरकारों से मांग की जाती है. हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दो, बंदर नुकसान नहीं पहुंचाएंगे.’ आदित्यनाथ ने आगे कहा कि नगर निगम की तरफ से गोशाला, कुत्तों, बंदरों और सभी पशु-पक्षियों के लिए व्यवस्था की जा रही है. मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने तीर्थ विकास परिषद की ओर से कराए जाने वाले करीब 350 करोड़ रु के विकास कार्यों का लोकापर्ण और शिलान्यास किया.

2021 की जनगणना में पहली बार अलग से ओबीसी की गिनती कराने का फैसला

केंद्र सरकार ने 2021 की जनगणना में पहली बार अलग से पिछड़े वर्ग (ओबीसी) की गिनती कराने का फैसला लिया है. दैनिक जागरण के पहले पन्ने पर प्रकाशित खबर के मुताबिक शुक्रवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जनगणना की तैयारियों की समीक्षा के दौरान ओबीसी के आंकड़े अलग से जुटाने के निर्देश दिए. इससे पहले ओबीसी की आबादी का अनुमान लगाने के लिए 2006 में एनएसएसओ सर्वे किया गया था. इसके मुताबिक कुल आबादी में पिछड़े वर्ग की हिस्सेदारी 41 फीसदी है. मंडल आयोग की सिफारिश पर इस तबके को 27 फीसदी आरक्षण दिया गया था. यह 1931 की जातिगत जनगणना पर आधारित था. इन बातों को देखते हुए ही पिछड़े वर्ग की अलग से जनगणना की मांग उठती रही है.

एसएससी परीक्षा के नतीजे पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की संयुक्त स्नातक परीक्षा-2017 और संयुक्त उच्चतर माध्यमिक स्तर परीक्षा 2017 के नतीजे घोषित करने पर रोक लगा दी है. दैनिक भास्कर में छपी खबर की मानें तो शीर्ष अदालत ने कहा है कि पहली नजर में ही एसएससी की पूरी परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी नजर आ रही है. वहीं, याचिकाकर्ता के वकील प्रशांतों भूषण और गोविंदजी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सीबीआई ने इस मामले की पहली स्टेटस रिपोर्ट में कहा है कि पेपर परीक्षा के आयोजकों ने ही लीक किया है. उन्होंने शीर्ष न्यायालय से मांग की है कि इसकी जांच होने तक नतीजे घोषित करने पर रोक लगाई जाए. बीते फरवरी में हुई इन परीक्षाओं में छात्रों ने पेपर लीक होने और सामूहिक नकल कराए जाने का आरोप लगाया था. साथ ही, उन्होंने इसे रद्द कर इसकी सीबीआई जांच और फिर से कराए जाने की मांग की थी.

विधि आयोग ने समान नागरिक संहिता के विचार को खारिज किया

विधि आयोग ने देश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के विचार को खारिज किया है. द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक आयोग ने कहा है कि इस वक्त यूसीसी की जरुरत नहीं है. हालांकि, इसकी जगह पर कई कानूनों में संशोधन की सिफारिश की गई है. इनमें तलाक संबंधी कानून, शादी के लिए उम्र की समानता और बाल विवाह पर रोक से जुड़े कानून शामिल हैं. आयोग ने अपनी 185 पन्नों की रिपोर्ट में धार्मिक आजादी और समानता के अधिकार के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया है. उसने महिलाओं की धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की भी बात कही है. आयोग ने धार्मिक परंपराओं में शामिल गुलामी, देवदासी, दहेज और तीन तलाक जैसी सामाजिक बुराइयों को खत्म किए जाने की बात कही है.