सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेत्री प्रिया प्रकाश के खिलाफ दर्ज उस एफआईआर को खारिज कर दिया है जिसमें उन पर ईशनिंदा करने का आरोप लगाया गया था. प्रिया प्रकाश वारियर पर यह आरोप अरु अदार लव नाम की एक फिल्म के गाने को लेकर लगाया गया था. इस गाने के एक वीडियो में प्रिया का आंख मारना पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था. लेकिन कुछ लोगों को यह इस्लाम के खिलाफ लगा. नतीजतन प्रिया प्रकाश के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई. अब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि आंख मारना कभी भी किसी भी धर्म के लिए ईशनिंदा नहीं हो सकता.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने भविष्य के लिए भी प्रिया प्रकाश को राहत दी है. पीठ ने कहा कि इस गाने को लेकर प्रिया प्रकाश, फिल्म के निर्देशक और निर्माता के खिलाफ कोई भी एफआईआर न दर्ज की जाए.

प्रिया प्रकाश के खिलाफ यह शिकायत इस साल 14 फरवरी को मुकीत खान नाम के व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई गई थी. उसका आरोप था कि आंख मार कर प्रिया ने उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत किया है. याचिकाकर्ता और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि खान द्वारा दर्ज की गई एफआईआर अनुचित लाभ लेने के मकसद से की गई प्रतीत होती है. कोर्ट ने साफ किया कि आंख मारना किसी धर्म या धार्मिक आस्था का अपमान करने या ऐसा करने की कोशिश के बराबर नहीं है. पीठ ने कहा, ‘यह गाना फरवरी 2018 से यूट्यूब पर है. हमारे जानने में यह नहीं आया कि इससे लोगों को अपमानित महसूस हुआ हो या आम लोगों को कोई नुकसान हुआ हो.’