नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने मंगलवार को देश की अर्थव्यवस्था में आई गिरावट के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को जिम्मेदार बताया है. समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में गिरावट सरकार द्वारा 500 और 1,000 रुपये के नोट बंद किए जाने के कारण नहीं बल्कि फंसे हुए कर्ज (एनपीए) पर राजन की नीतियों के कारण आई है. उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्था में आई गिरावट नोटों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले से नहीं आई थी. बल्कि उस समय अर्थव्यवस्था में गिरावट का ट्रेंड चल रहा था, जिसकी शुरुआत 2015-16 की चौथी तिमाही में ही हो गई थी.

राजीव कुमार ने विकास दर में गिरावट के लिए बढ़ते एनपीए और रघुराम राजन को जिम्मेदार बताते हुए कहा, ‘विकास दर में गिरावट बैंकिंग सेक्टर में एनपीए समस्या बढ़ने की वजह से आ रही थी.’ उन्होंने कहा कि 2017 के मध्य तक एनपीए बढ़कर 10 लाख करोड़ रुपये हो गया था. जब सरकार सत्ता में आई तो यह आंकड़ा करीब 4 लाख करोड़ रु था. राजीव कुमार ने आगे कहा कि एनपीए के बढ़ने की वजह से बैंकों ने उद्योगों को उधार देना बंद कर दिया जिससे अर्थव्यवस्था में सुस्ती आई.

हाल में रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट में बीते कुछ समय के दौरान अर्थव्यवस्था की सुस्ती के लिए नोटबंदी को जिम्मेदार ठहराया गया था. इसमें कहा गया था कि लगभग दो साल पहले हुई नोटबंदी और उसके एक साल बाद लागू जीएसटी ने देश के मध्यम और लघु उद्योगों की कमर तोड़ दी है. रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी लागू होने के दो साल बाद भी ये उद्योग इसके असर से पूरी तरह से उबर नहीं सके हैं.