आधार कार्ड की वजह से मध्‍य प्रदेश के दमोह जिले का रहने वाला 17 साल का अरुण तिवारी अपने परिजनों से मिला. अरुण तीन महीने पहले बेंगलुरु से लापता हो गया था. 11 अप्रैल 2018 को बेंगलुरु के यशवंतपुर रेलवे स्‍टेशन से एक एनजीओ को वह लावारिस अवस्‍था में मिला. एनजीओ ने अरुण को होसूर रोड स्‍थ‍ित सरकार द्वारा संचालित शेल्टर होम में रखवाया. इसके बाद अरुण के परिजनों को खोजने का काम शुरू किया गया. अधिकारियों के प्रयासों के बाद अरुण अपने परिजनों से 2 जुलाई को मिला.

अरुण की तरह दूसरे 15 मानसिक रूप से कमजोर बच्चे जो खो गए थे वे भी आधार की मदद से अपने परिजनों से मिल पाए. बेंगलुरु के कुछ एनजीओ को ये बच्चे रेलवे स्टेशन लावारिस हालत में मिले थे. इन बच्चों को बाल कल्याण विभाग द्वारा संचालित आश्रय गृह में रखवाया गया था. द टाइम्स ऑफ इंडिया मुताबिक आश्रय गृह के अधीक्षक आर नागारत्ना ने बताया, ‘जब हमने गुमशुदा बच्चों आधार पंजीकरण करवाना शुरू किया तो पता चला कि उनमें से कई बच्चों का आधार कार्ड बन चुका था. इसके बाद हमने आधार अधिकारियों से संपर्क किया. हमें कई बच्चों के परिजनों की जानकारी मिली. अरुण के परिजनों का पता भी हमें आधार के कारण ही मिल पाया.’ आर नागारत्ना ने बताया कि अरुण ने एनजीओ वालों को अपना नाम साहिल बताया था लेकिन आधार में उसका नाम अरुण तिवारी के नाम से पंजीकृत है.

आर नागारत्ना ने बताया कि इस वक्त करीब 72 लड़के-लड़कियां उनके आश्रय गृह में हैं. जिनमें से 9 की उम्र 21 साल से अधिक है. वे सभी अपने परिजनों को याद करते हैं. मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण वे ज्यादा कुछ नहीं बता सकते.