भारत और फ्रांस के बीच हुए रफाल विमान सौदे का मुद्दा संसद के गलियारों से होता हुआ अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. रफाल रक्षा सौदे में अनियमितताओं के आरोपों के मद्देनजर एमएल शर्मा नाम के एक अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इस रक्षा सौदे को रद्द करने के लिए एक जनहित याचिका दाखिल की है. एनडीटीवी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया है. अब सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई में एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ अलगे हफ्ते इस पर सुनवाई करेगी.

भारत और फ्रांस के बीच हुए इस रक्षा सौदे को लेकर बीते कुछ समय से कांग्रेस और पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमलावर रुख बना रखा है. इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पूर्व सरकारों में केंद्रीय मंत्री रह चुके कई दूसरे नेताओं ने भी इस सौदे के वित्तीय लेन-देन पर सवाल उठाया है. साथ ही महालेखा परीक्षक (सीएजी) से इसकी जांच कराए जाने की मांग भी की है. उधर, रफाल सौदे में कथित भ्रष्टचार के आरोपों को केंद्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पहले ही खारिज कर चुकी हैं. साथ ही गोपीनीयता के आधार पर उन्होंने इस सौदे से जुड़ी अनेक बातों को सार्वजनिक न करने की बात कही थी.

फ्रांस की कंपनी डसाल्ट एविऐशन से रफाल लड़ाकू विमान हासिल करने की प्रक्रिया संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार (यूपीए) के कार्यकाल में शुरू हुई थी पर तत्कालीन सरकार के शासनकाल में यह सौदा परवान नहीं चढ़ सका था. इसके बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार ने नए सिरे से इस रक्षा सौदे की प्रक्रिया शुरू की थी. इसके बाद सितंबर 2016 में 36 रफाल विमान हासिल करने के लिए भारत ने फ्रांस सरकार के साथ सौदा किया था.