देश में समलैंगिकता अपराध है या नहीं, इस पर सुप्रीम कोर्ट आज फैसला सुना सकता है. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. इससे पहले बीती 17 जुलाई को शीर्ष अदालत ने इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट साफ कर चुका है कि आईपीसी की धारा-377 की वैधता तय करते वक्त संवैधानिक मूल्यों का पालन किया जाएगा और यह नहीं देखा जाएगा कि इस पर लोगों की क्या सोच है. फिलहाल आईपीसी की इस धारा में समलैंगिकता को अपराध बताया गया है.

आधार संख्या न होने पर स्कूल छात्रों को एडमिशन देने से इनकार नहीं कर सकते. यह खबर भी अखबारों की प्रमुख सुर्खियों में शामिल है. इस बारे में यूआईडीएआई की ओर से एक सर्कुलर जारी किया गया है. इसमें कहा गया है, ‘यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आधार कार्ड की वजह से किसी भी बच्चे को उसके अधिकार से वंचित न किया जाए.’ प्राधिकरण ने इसका पालन न करने पर स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की भी चेतावनी दी है.

पांच सामाजिक कार्यकर्ताओं को सरकार से असहमति की वजह गिरफ्तार नहीं किया गया : महाराष्ट्र पुलिस

महाराष्ट्र पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि उसने पांच सामाजिक कार्यकर्ताओं को सरकार से असहमति संबंधी विचारों की वजह से गिरफ्तार नहीं किया है. पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी की वजह इनके देश के माहौल को बिगाड़ने की साजिश बताया है. उसने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया है कि इनके खिलाफ पर्याप्त सबूत भी हैं. दैनिक भास्कर में छपी खबर के मुताबिक महाराष्ट्र पुलिस ने 21 पन्नों के हलफनामे में कहा है कि आरोपित पुणे के भीमा-कोरेगांव में अराजकता मचाने की कोशिश में थे. इसके अलावा इसमें कहा गया है कि वह इन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ करना चाहती है.

हम किसी निरंकुश नहीं बल्कि, लोकतांत्रिक राष्ट्र में रहते हैं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मलयाली उपन्यास ‘मीशा’ के कुछ हिस्सों को हटाने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. राजस्थान पत्रिका के पहले पन्ने पर प्रकाशित खबर के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘हम किसी निरंकुश नहीं बल्कि, लोकतांत्रिक राष्ट्र में रहते हैं. यह विचारों के आदान-प्रदान और अभिव्यक्ति की आजादी देता है.’ इसके आगे पीठ ने कहा, ‘खुद को स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्त करना लेखक का मौलिक अधिकार है. किताबों पर पाबंदी की संस्कृति विचारों के मुक्त प्रवाह को सीधे प्रभावित करती है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अपमान करती है.’ दूसरी ओर, इस उपन्यास के खिलाफ दायर याचिका में कहा गया था कि इसमें मंदिर जाने वाली हिंदू महिलाओं के लिए अपमानजनक बातें हैं.

पश्चिम बंगाल : वीएचपी का कथित लव जिहाद के खिलाफ अभियान

कट्टर हिंदूवादी संगठन विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) पश्चिम बंगाल में कथित लव जिहाद के खिलाफ स्कूलों-कॉलेजों में पर्चे बांट रहा है. नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इनमें कई तरीके बताए गए हैं, जिनसे मुसलमान लड़के हिंदू लड़कियों का दिल जीतते हैं. इनमें बाइक पर बैठाना और झूठे वादे करना शामिल हैं. साथ ही, मुसलमान युवक हिंदू लड़कियों का दिल जीतने के लिए तोहफे देते हैं. वे अभिनेताओं की तरह कपड़े पहनते हैं और अभिनय करते हैं. इसके अलावा लोगों को भ्रमित करने के लिए पिंटू और मिंटू जैसे हिंदू नामों का इस्तेमाल करते हैं. दूसरी ओर, इन पर्चों में इनसे बचने के उपाय भी बताए गए हैं. इनमें हिंदू लड़कियों को सिंदूर लगाना, मंगलसूत्र पहनना और लाल-सफेद चूड़ियां पहनने की सलाह दी गई है.

इंडोनेशिया : घर से बाहर महिलाओं और पुरुषों के एक साथ खाने पर पाबंदी

इंडोनेशिया के असेह प्रांत स्थित एक जिले में महिलाओं और पुरुषों को एक साथ खाने पर पाबंदी लगा दी गई है. दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक महिलाएं घर से बाहर अब केवल अपने पति या करीबी रिश्तेदार के साथ ही खाना खा सकती हैं. वहीं, अकेली महिला को रात नौ बजे के बाद किसी रेस्तरां और कैफे में सेवाएं नहीं दी जाएंगी. असेह प्रांत महिलाओं पर पहले भी कई तरह के प्रतिबंध लगाने की वजह से आलोचनाओं के घेरे में रहा है. हालांकि, इस ताजा फैसले का बचाव करते हुए एक अधिकारी का कहना है कि इससे महिलाएं अधिक सभ्य होंगी. इससे पहले 2013 में असेह प्रांत में ही दोपहिया वाहनों पर सवार महिलाओं को दोनों ओर पैर करके बैठने पर रोक लगा दी गई थी.