तेलंगाना में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है. सूत्र बताते हैं कि छह सितंबर, गुरुवार को तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के प्रमुख और मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने दिन में एक बजे मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई है. बैठक के बाद डेढ़ बजे वे राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन से मिलने वाले हैं. फिर दो बजे उन्हें मीडिया से बात करनी है जिसमें वे विधानसभा भंग करने के फैसले का ख़ुलासा कर सकते हैं. इस बाबत द न्यू इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशत ख़बर की मानें तो केसीआर यह सब इसलिए कर रहे हैं कि ताकि इसी साल के अंत तक मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिज़ाेरम के साथ तेलंगाना में भी चुनाव हो जाएं. लेकिन उनकी इस योजना के मुताबिक आयोग भी फैसला करेगा इस बारे में दावे के साथ कोई कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है.

अख़बार ने चुनाव आयोग के सूत्रों के हवाले से ही बताया है कि नवंबर-दिसंबर में ही तेलंगाना विधानसभा के चुनाव कराने की संभावना काफी कम है. हालांकि राज्य के निर्वाचन अधिकारी रजत कुमार की मानें तो विधानसभा चुनाव के लिए ज़रूरी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) एवं वोटर वैरीफाएबिल पेपर ऑडिट ट्रेल (मतदाता पर्ची) मशीनें आदि नवंबर के अंत तक उपलब्ध हो जाएंगी. लेकिन इसके बाद चुनाव कब कराए जाने हैं, इसका फैसला भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ही करेगा.

इधर ईसीआई के सूत्र बताते हैं कि मसला सिर्फ ईवीएम और वीवीपीएटी मशीनों की उपलब्धता का नही हैं. नवंबर के महीने तक इनकी समुचित उपलब्धता के बाद भी इसकी संभावना कम है कि उसी समय तेलंगाना में विधानसभा चुनाव करा लिए जाएं. क्योंकि अगर अभी विधानसभा भंग होती है तो ईसीआई को चुनाव की अन्य तैयारियों के लिए समय की ज़रूरत होगी. मसलन- मतदाता सूचियों का अपडेशन, सुरक्षा बलों, मतदान केंद्रों और चुनाव सामग्री लाने-ले जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी.

सूत्रों के मुताबिक, ‘किसी भी राज्य में चुनाव की तैयारियों के लिए तीन से चार महीने तक लग जाते हैं. ऐसे में इस बात की संभावना ज़्यादा बनती है कि तेलंगाना में अगले साल ही विधानसभा चुनाव हों. बहुत संभव है, जनवरी या फरवरी में. जहां तक मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिज़ाेरम का ताल्लुक़ है ताे इन राज्यों में विधानसभा चुनाव की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं. जबकि तेलंगाना में विधानसभा भंग होने के बाद ये शुरू होंगी. आयोग के पास इसके लिए छह महीने का समय होगा.’