देश के 23 बड़े बैंकों के कर्मचारी इन दिनों नाराज़ बताए जाते हैं. नाराज़गी की वज़ह यह है कि इन बैंकों पर आर्थिक दंड लगाए जाने का ख़तरा मंडरा रहा है. वह भी उस आधार पर जिसका बैंक कर्मचारियों के मुताबिक उनके काम से कोई ख़ास ताल्लुक़ नहीं है. द इकॉनॉमिक टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से यह ख़बर दी है. इसमें बताया है कि आधार का काम देखने वाली संस्था यूआईडीएआई (यूनीक़ आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया) ने 23 प्रमुख बैंकों पर आर्थिक दंड लगाने की चेतावनी दी है.

सूत्रों के मुताबिक यूआईडीएआई ने आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, बैंक ऑफ बड़ौदा सहित 23 बैंकों को पिछले सप्ताह चेतावनी जारी की है. इसमें साफ कहा है कि वे एक नवंबर तक हर शाखा में रोज कम से कम आठ आधार पंजीकरण या अपडेशन का काम करें. नहीं तो उनके ख़िलाफ़ आर्थिक दंड लगाया जाएगा. बताया जाता है कि यह निर्धारित लक्ष्य पूरा न करने पर आर्थिक दंड जुलाई-2018 वसूल किया जाएगा. इसी चेतावनी की वज़ह से बैंक कर्मचारियों में नाराज़गी है.

एक बैंककर्मी नाम न छापने की शर्त पर कहते भी हैं, ‘यूआईडीएआई नियामक संस्था नहीं है. वह इस तरह बैंकाें को आर्थिक दंड की चेतावनी कैसे दे सकती है? वह भी आरबीआई (भारतीय रिज़र्व बैंक) को पूरी तरह नज़रंदाज़ करते हुए.’ एक अन्य बैंक अधिकारी कहते हैं, ‘आधार का पंजीयन कराना हमारा मुख्य काम नहीं है. हम वैसे ही कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं. तिस पर यह आदेश, वह भी चेतावनी के साथ. यह हमारे लिए मुश्किल हालात में काम करने जैसा ही है.’

लेकिन यूआईडीएआई की दलील है कि वह ‘आधार अधिनियम-2016 के प्रावधानों के तहत बैंकों पर आर्थिक दंड लगाने जैसे क़दम उठाने के लिए सक्षम और अधिकृत है.’ ख़बर के मुताबिक जिन बैंकाें पर आर्थिक दंड का ख़तरा मंडरा रहा है उनमें आईसीआईसीआई सबसे ऊपर है. उसके ख़िलाफ़ अब तक 82 लाख रुपए का आर्थिक दंड हो चुका है. इसके बाद इंडियन ओवरसीज़ बैंक (68 लाख रुपए), कैनरा बैंक (64.2 लाख रुपए) और यूको बैंक (57 लाख रुपए) का नंबर है.

बीती एक जून को यूआईडीएआई ने सभी बैंकों को एक जुलाई से रोज हर शाखा में कम से कम आठ आधार पंजीयन/अपडेशन का लक्ष्य दिया था. इसके बाद एक अक्टूबर से आधार पंजीयन/अपडेशन की यह संख्या बढ़ाकर हर शाखा में रोज 12 और एक जनवरी 2019 से 16 की जाने वाली है. लेकिन इस आदेश को मानने में बैंकों की सुस्ती को देखते हुए यूआईडीएआई ने चेतावनी के साथ पहले चरण की समय सीमा को एक अक्टूबर के बजाय एक नवंबर कर दिया है.