हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से सोशल मीडिया पर गंदगी न फैलाने की अपील की. उत्तर प्रदेश के वाराणसी में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘सोशल मीडिया पर कभी-कभी लोग मर्यादाएं भूल जाते हैं.’ प्रधानमंत्री का आगे कहना था, ‘कई लोग ऐसे ऐसे शब्दों का प्रयोग करते हैं जो सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किए जा सकते हैं और न ही शोभा देते हैं. महिलाओं के खिलाफ भी ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं.’ नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से यह संकल्प लेने को कहा कि वे सोशल मीडिया का उपयोग कभी भी गंदगी फैलाने के लिये नहीं करेंगे.

लेकिन सोशल मीडिया पर गंदगी न फैलाने की अपील करने वाले प्रधानमंत्री खुद सोशल मीडिया पर कई ऐसों को फॉलो करते दिखते हैं जो इस तरह की गंदगी फैलाते हैं. नरेंद्र मोदी ऐसे ट्विटर हैंडलों को फॉलो कर रहे हैं जो सोशल मीडिया के जरिए समाज और देश में जहर बोने का काम करते हुए दिखते हैं. इनमें से अधिकांश ट्विटर हैंडल आपत्तिजनक ट्वीट ही नहीं करते बल्कि बड़ी संख्या में ऐसे ट्वीट्स को रीट्वीट भी करते हैं. ऐसा नहीं है कि केवल प्रधानमंत्री ही ऐसा कर रहे हैं. उनके सहयोगी मंत्री भी ऐसा करते दिखते हैं. इनमें वित्त मंत्री अरुण जेटली सहित कई शामिल हैं.

बीते कुछ वर्षों के दौरान सोशल मीडिया एक ऐसे प्लेटफॉर्म के रूप में सामने आया है, जहां किसी खास पार्टी, विचारधारा या धर्म के समर्थक अपने विरोधियों या आलोचकों को आपत्तिजनक शब्दों के साथ निशाना बनाते हैं. महात्मा गांधी से लेकर जवाहरलाल नेहरू तक वे किसी को नहीं बख्शते. इस दौरान मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दी जाती हैं. लोगों को भद्दी से भद्दी गालियों के साथ बलात्कार करने तक की धमकियां दी जाती हैं. सोशल मीडिया की शब्दावली में इसे ट्रोल करना कहा जाता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्विटर हैंडल के 4.38 करोड़ फॉलोअर्स हैं. वे 2000 से अधिक लोगों को फॉलो भी करते हैं. इनमें एक निखिल दधीच नाम का एक शख्स भी था. बीते साल जब कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की गई थी तो निखिल दधीच (@nikhildadhich) ने इसे जायज ठहराया था. साथ ही, उसने गौरी लंकेश के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था. उस वक्त निखिल दधीच को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सवालों के कटघरे में दिखाई दिए थे. इसकी वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उसे ट्विटर पर फॉलो करना था.

आज से दो साल पहले भी सत्याग्रह की एक रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया था कि महिलाओं को गाली देने वाले और समाज में नफरत घोलने का काम करने वाले ट्विटर अकाउंट्स को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फॉलो करते हैं. इसके दो साल बाद भी हिंदू होने का अभिमान करने वाले कई ट्विटर यूजर्स को इस बात का गुमान है कि प्रधानमंत्री अभी भी उन्हें फॉलो करते हैं. इस बात को वे अपने परिचय (इंट्रो) में भी बताते हैं.

ऐसा ही एक अकाउंट है ‘मधुर ¯\_(ツ)_/¯ મધુ’ (@ExSecular ‏). इस अकाउंट के जरिए बीती 24 अगस्त को किए गए एक ट्वीट में कहा गया, ‘केरल में बाढ़ पीड़ितों के नाम पर बंगलादेशी मुसलमानों को कोई राहत नही दी जानी चाहिए.’ यह ट्वीट सोशल मीडिया पर चलाए गए उसी अभियान का हिस्सा है जिसके जरिये भीषण बाढ़ के लिए केरल के एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया जा रहा था. इसके अलावा इस ट्विटर यूजर ने कई ऐसे ट्वीटों को रीट्वीट किया है, जिनमें मुस्लिम समुदाय के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘हिंदू डिफेंस लीग’ (@HDL_Global) के अकाउंट को भी फॉलो करते हैं. यह हिंदुत्व की विचारधारा का प्रतिनिधित्व करने की बातें करता है. साथ ही, इसके ट्विटर अकाउंट पर मुसलमानों के खिलाफ भी कई ट्वीट किए गए हैं. इस अकाउंट को नरेंद्र मोदी के साथ केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली भी फॉलो करते हैं. बीती 23 जनवरी को किए गए इसके एक ट्वीट में हिंदुओं से सिर पर भगवा धारण कर जाति के आधार पर न बंटने की अपील की गई है. इससे पहले प्रधानमंत्री ‘हिंदू डिफेंस लीग’ (@HDLindiaOrg) को भी फॉलो करते थे. लेकिन, फिलहाल यह अकाउंट बंद दिख रहा है. इस ट्विटर हैंडल से 22 फरवरी, 2016 को महात्मा गांधी को लेकर आपत्तिजनक ट्वीट किया गया था. इसमें कहा गया था, ‘श्री नाथूराम न आतंकी न शाहिद थे, वह एक वीर बलिदानी थे जिसने पाकिस्तान परस्त गांधी का संहार किया था.’

दूसरी ओर, ऐसा नहीं है कि केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता जिन्हें फॉलो करते हैं उन ट्विटर अकाउंट्स से केवल भाजपा और इसकी विचारधारा से असहमति रखने वाले पर ही कीचड़ उछाला जाता है. कभी-कभी इसका निशाना खुद भाजपा और मोदी सरकार भी बनती है. बीती पांच सितंबर को ऐसे ही एक अकाउंट Jay® (@Saffron_Rocks) ने एक ट्वीट किया, ‘80% पर काला कानुन लादकर पूछते हो तुम्हारी तादाद कितनी है? 2019 में हम बतायेंगे भाजपा की औकात कितनी है “कांग्रेस मुक्त भारत”करते करते आपके कदम “सवर्ण मुक्त भारत” की और चलपड़े और अंधभक्त समझ ही नहीं पाए साहब के मन की बात।भाजपा से हिंदुत्व नहीं,हिंदुत्व से भाजपा है,वरना भाजपा शून्य’

इस ट्वीट को स्वेच्छा सिंह के ट्विटर हैंडल से भी रीट्वीट किया गया जिसे केंद्रीय मंत्री गिरीराज सिंह फॉलो करते हैं. इस ट्वीट के जरिए एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले बाद संशोधन विधेयक लाकर इस कानून को मूल स्वरूप में लाने के चलते भाजपा के खिलाफ नाराजगी जाहिर की गई है. शीर्ष अदालत ने इस कानून के तहत आरोपित की सीधी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी.

इसके अलावा गिरिराज सिंह जिन्हें फॉलो करते हैं, उनमें @Chopdasaab ‏और@chintanvedant ‏ जैसे ट्विटर हैंडल शामिल हैं. इसमें @Chopdasaab के ट्विटर हैंडल से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को निशाना बनाने के लिए महात्मा गांधी का अपमान करने वाली तस्वीर पोस्ट की गई. राहुल गांधी ने गुजरात में एक सार्वजनिक सभा में इस ट्वीट में लिखे गए शब्दों का इस्तेमाल किया था. इस अकाउंट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी फॉलो करते हैं.

उधर, साध्वी निरंजन ज्योति भी उन केंद्रीय मंत्रियों में शामिल हैं जिन्होंने सोशल मीडिया पर गंदगी फैलाने वाले ट्विटर हैंडल को फॉलो कर रखा है. इससे पहले वे खुद कई बार विपक्ष के नेता और एक समुदाय विशेष के लिए विवादास्पद बयान देती हुई दिख चुकी हैं. साल 2015 के दिल्ली चुनाव के दौरान उन्होंने एक सार्वजनिक सभा में कहा था, ‘आपको तय करना है कि दिल्ली में सरकार रामजादों की बनेगी या हरामजादों की. यह आपका फैसला है.’ उनकी फॉलोइंग की सूची में ‘नेशन फर्स्ट पिंकू’ (@imPk_MODIfied) नाम का एक ट्विटर हैंडल भी शामिल है. इस ट्विटर हैंडल से आपत्तिजनक ट्वीटों को लगातार रीट्वीट किया गया है. इनमें समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करने वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ में शामिल न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को लेकर भी एक भद्दा मजाक मजाक किया गया है.

इन ट्वीट्स में कई ऐसे अकाउंट से रीट्वीट किए गए हैं जिन्हें प्रधानमंत्री फॉलो करते हैं. यानी ट्विटर पर गंदगी फैलाने का एक जाल फैला हुआ दिखता है, जिसमें प्रधानमंत्री सहित उनके अन्य मंत्री भी शामिल दिखते हैं.

कुछ समय पहले सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने बताया था कि नरेंद्र मोदी अपना ट्विटर अकाउंट खुद ही चलाते हैं. इन बातों को देखते हुए कहा जा सकता है कि 125 करोड़ देशवासियों से तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि सोशल मीडिया पर गंदगी न फैलाएं. दूसरी ओर, वे और उनके मंत्री खुद इस तरह की गंदगी फैलाने वालों को फॉलो करते हैं. ऐसे में यह प्रदूषण कैसे कम होगा?