चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कहा है कि अगले साल होने वाले आम चुनाव में वे किसी पार्टी की चुनावी कमान नहीं संभालेंगे. इसके साथ ही उनके किसी राजनीतिक दल के साथ जुड़ने संबंधी अटकलों को भी उन्होंने खारिज कर दिया है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक प्रशांत किशोर ने ये बातें रविवार की रात हैदराबाद के इंडियन स्कूल आॅफ बिजनेस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पूछे गए एक सवाल के जवाब में कही हैं.

प्रशांत किशोर के मुताबिक, ‘2019 के चुनाव में आप मुझे किसी पार्टी के लिए काम करते हुए नहीं देखेंगे. अब मेरी इच्छा गुजरात या फिर बिहार में जमीनी स्तर पर लौट कर आम लोगों के साथ काम करने की है. लेकिन इसके पहले मैं अपनी संस्था इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आईपीएसी) को उपयुक्त हाथों में सौंपना चाहता हूं.’

इस दौरान उन्होंने उन खबरों को भी खा​रिज किया कि उन्होंने या उनकी संस्था ने राजनीतिक दलों व नेताओं का काम करने के लिए बड़ी रकम हासिल की थी. प्रशांत किशोर ने आगे कहा, ‘हमारी संस्था ने कई दलों के लिए चुनावी रणनीति बनाई. लेकिन एक राजनीतिक दल को छोड़कर दूसरे राजनीतिक दल के साथ जुड़ने के फैसले में हमने पैसे को आखिरी मापदंड के रूप में ही रखा.’

बीते कुछ वर्षों के दौरान प्रशांत किशोर द्वारा किसी पार्टी की चुनावी रणनीति तैयार करने को उसकी जीत की गारंटी के तौर पर देखा जाता रहा है. प्रशांत किशोर सबसे पहले 2014 के आम चुनाव के दौरान तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चुनाव प्रचार को ‘मोदी लहर’ का रूप दे दिया था. उस आम चुनाव में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की थी.

2014 के आम चुनाव के बाद साल 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान प्रशांत किशोर ने भाजपा को छोड़ राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और कांग्रेस गठबंधन के प्रचार की कमान संभाली थी. उस विधानसभा चुनाव में इस गंठबंधन को भारी जीत मिली थी. इसके बाद प्रशांत किशोर ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रचार की कमान संभाली थी, हालांकि पार्टी के कुछ नेताओं के साथ तालमेल न बैठने पर कुछ समय बाद उन्होंने वह काम छोड़ दिया था.