राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षा निगरानी समिति (एनएमसीएमई) ने एक राष्ट्रीय स्तर का मदरसा बोर्ड बनाने की सिफारिश की है. यह सिफारिश हाल ही में संपन्न हुई एनएमसीएमई की एक बैठक में की गई. एनएमसीएमई मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत आती है. इसका मानना है कि बोर्ड के बनने से मदरसों में दी जाने वाली शिक्षा का एक मानक तय किया जा सकेगा. इस समिति का मुख्य कार्य अल्पसंख्यक शिक्षा को बढ़ावा देने और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में सुधारों के लिए सरकार को सुझाव देना है.

इस बैठक में मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर सहित लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य, शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता और अल्पसंख्यक मुद्दों से संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे. इस दौरान समिति के सदस्य अफजार शम्सी ने कहा, ‘देश में दो तरह के मदरसे हैं. पहले, जो पंजीकृत हैं. ये कुल मदरसों की संख्या का केवल 20 प्रतिशत हैं. बाकी बचे 80 प्रतिशत मदरसे अपंजीकृत हैं. सरकार के पास जो जानकारी है वह केवल पंजीकृत मदरसों की है’. उन्होंने आगे कहा, ‘हमें इन बाकी बचे मदरसों की सारी जानकारी एकत्रित करनी होगी ताकि इन्हें भी पंजीकरण के दायरे में लाया जा सके’. समिति के एक और सदस्य जमशेद खान ने कहा, ‘मदरसों को मान्यता देने के लिए हमें एक राष्ट्रीय स्तर के मदरसा बोर्ड का गठन करना होगा जिससे शिक्षा का एक स्तर तय किया जा सके’.