‘हिंसा का तांडव और मौत का खेल बंद होना चाहिए.’  

— रविशंकर प्रसाद, केंद्रीय कानून मंत्री

रविशंकर प्रसाद का यह बयान सोमवार को देशव्यापी ‘भारत बंद’ के दौरान बिहार में दो साल की एक बच्ची की मौत हो जाने के संबंध आया है. बंद के चलते सड़कों पर प्रदर्शन और जाम की वजह से इस बच्ची को समय पर अस्पताल तक नहीं पहुंचाया जा सका था. इस घटना पर दुख जताते हुए रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस से पूछा है कि आखिर इस बच्ची की मौत का जिम्मेदार किसे ठहराया जाना चाहिए? उनका यह भी कहना है, ‘आम जनता की परेशानियों को सरकार अच्छी तरह से समझती है और परेशानी का समाधान निकालने के लिए वह पूरी कोशिश कर रही है.’


‘बैंकों के एनपीए के लिए यूपीए सरकार और इसकी नीतियां जिम्मेदार हैं.’  

— रघुराम राजन, आरबीआई के पूर्व गवर्नर

रघुराम राजन ने यह बात लोकसभा की एक संसदीय समिति को भेजे गए अपने जवाब में कही है. उनके मुताबिक, ‘साल 2006 के दौरान बुनियादी ढांचा संबंधी परियोजनाओं में निवेश को फायदे का सौदा माना जा रहा था. ऐसे में इन परियोजनाओं को लेकर बैंकों ने धड़ाधड़ कर्ज बांटे थे, पर 2008 में आई आर्थिक मंदी ने लाभ के उन तमाम अनुमानों को ध्वस्त कर डाला. इसके बाद बड़े कर्जदारों के खिलाफ कार्रवाई से स्थिति कहीं और न बिगड़ जाए इसलिए बैंकों ने उन्हें कर्ज लौटाने के नाम पर और कर्ज दे डाला.’ रघुराम राजन का यह भी कहना है, ‘खुद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार पर ही घोटालों के आरोप लगने से वह फंसे हुए कर्ज को लेकर उचित समय पर सही फैसले नहीं कर सकी. इस वजह से एनपीए का स्तर बढ़ता चला गया.’


‘देश को नरेंद्र मोदी सरकार से बचाए जाने की जरूरत है.’  

— सीताराम येचुरी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव

सीताराम येचुरी ने यह बात सोमावार को भारत बंद के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए कही. उनके मुताबिक, ‘नरेंद्र मोदी को सत्ता से बेदखल करने का लक्ष्य एक दिन के विरोध-प्रदर्शन से हासिल नहीं किया जा सकता. विपक्षी दलों को इसके लिए एकजुट होकर निरंतर कोशिश करनी होगी.’ उधर, कांग्रेसी नेताओं ने एक बार फिर पेट्रोल-डीजल को वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) के दायरे में लाए जाने की मांग की है.


‘निर्भया बलात्कार और हत्या के मामले के दोषियों को सजा देने में देर क्यों हो रही है?’  

— स्वाति मालीवाल, दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष

स्वाति मालीवाल ने यह बात दिल्ली के तिहाड़ जेल प्रशासन से एक ​चिट्ठी लिखकर पूछी है. उनका कहना है कि छह साल पुराने इस मामले के दोषियों को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पहले ही फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है. ऐसे में क्या वजह है कि इन अपराधियों को अब तक उनकी सजा के अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सका? इससे पहले निर्भया की मां ने इस मामले के दोषियों को सजा दिए जाने में देरी को लेकर दिल्ली महिला आयोग के पास शिकायत दर्ज कराई थी.