पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से कर्ज़ धोखाधड़ी के बाद देश छोड़कर भाग चुके कारोबारी मेहुल चौकसी का मामला भी लंदन पहुंच सकता है. सूत्रों के हवाले से हिंदुस्तान टाइम्स ने यह ख़बर दी है. लंदन की अदालतों में शराब कारोबारी विजय माल्या और हीरे-जवाहरात के व्यापारी नीरव मोदी का केस पहले से ही चल रहा है. मेहुल चौकसी ने हीरे-जवाहरात के कारोबारी अपने रिश्तेदार नीरव मोदी के साथ मिलकर पीएनबी से 13,500 करोड़ रुपए से ज़्यादा का कर्ज़ लिया था. लेकिन इसे चुकाए बिना ही दोनों विदेश भाग गए.

अख़बार के मुताबिक चौकसी के प्रत्यर्पण का मामला यूं ताे एंटीगुआ-बारबूडा की अदालत में है. क्योंकि चौकसी ने एंटीगुआ की नागरिकता ले रखी है. लेकिन अंतिम रूप से उसका मामला भी लंदन पहुंचने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. इसकी वज़ह यह है कि एंटीगुआ-बारबूडा दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शुमार हैं जिन्होंने अब भी कई मामलों में ब्रिटेन के अधिकारों को स्वीकार कर रखा है. इनमें न्यायिक अधिकार भी शामिल हैं. इसी के तहत एंटीगुआ-बारबूडा की सुप्रीम कोर्ट के फैसले के ख़िलाफ़ ब्रिटेन की ज्यूडीशियल कमेटी ऑफ द प्राइवी काउंसिल (जेसीपीसी) में अपील किए जाने का प्रावधान है.

चौकसी की कानूनी टीम के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘हमने एंटीगुआ-बारबूडा की सुप्रीम कोर्ट में संभावित प्रत्यर्पण के ख़िलाफ़ याचिका दायर की है. इसमें एंटीगुआ के प्रत्यर्पण कानून काे चुनौती दी है. साथ ही प्रत्यर्पण रोकने की अपील भी की है. याचिका पर अगले दो महीने के भीतर सुनवाई होने की संभावना है. इस मामले में फैसला किसी के भी विरुद्ध आए, उसके पास इसके ख़िलाफ़ जेसीपीसी में अपील का विकल्प खुला होगा. ऐसे में अंतिम फैसला लंदन में ही होने की संभावना है.’

ग़ौरतलब है कि लंदन की अदालतों में शराब कारोबारी विजय माल्या और नीरव मोदी के प्रत्यर्पण का मामला पहले से ही चल रहा है. नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अभी बीते महीने ही लंदन में अर्ज़ी लगाई है. उससे कुछ समय पहले ही उसके वहां होने की पुष्टि हुई थी. वैसे ध्यान रखने की बात ये भी है कि ब्रिटेन की अदालतों से भारतीय अपराधियों का प्रत्यर्पण अब तक बहुत आसान साबित नहीं हुआ है. बताया जाता है कि बीते 16 में (साल 2002 से) लगभग 29 भगोड़े अपराधियों ने लंदन में शरण ली है. इन अपराधियों को भारत लाने के लिए ब्रिटेन ने बीते सालों में नौ बार भारत की प्रत्यर्पण अर्ज़ियां ख़ारिज़ की हैं.