भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का लॉन्च व्हीकल पीएसएलवी सी42 रविवार 16 सितंबर को दो ब्रिटिश उपग्रहों के साथ श्रीहरिकोटा से उड़ान भरेगा. द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक इसरो प्रमुख के सिवन ने बताया कि यह पूरी तरह से व्यावसायिक प्रक्षेपण है. इससे पहले इसरो ने 23 अप्रैल 2007 में पहली बार व्यावसायिक रॉकेट का प्रक्षेपण किया था. तब इसरो ने अपने लॉन्च व्हीकल पीएसएलवी-सीए से इटली के उपग्रह एजीआईएलई को अंतरिक्ष में भेजा था. इसके बाद 10 जुलाई 2015 को इसरो ने कीर्तिमान स्थापित करते हुए अपने लॉन्च व्हीकल पीएसएलवी-एक्सएल से ब्रिटेन के पांच उपग्रहों को एक साथ अंतरिक्ष में स्थापित किया था जिनका कुल वजन 1439 किलो ग्राम था.

भारत अब तक 28 देशों के 237 उपग्रहों को प्रक्षेपित कर चुका है. इसरो उपग्रह प्रक्षेपण के वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी को बढ़ाना चाहता है. अभी 36 हजार करोड़ वाले वैश्विक उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में इसरो की हिस्सेदारी महज 0.6 प्रतिशत है. वहीं दूसरी ओर एलन मस्क के स्वामित्व वाली अमेरिका की निजी कंपनी स्पेस-एक्स की 2013 में इस बाजार में हिस्सेदारी पांच प्रतिशत थी जो साल 2017 में बढ़कर 45 प्रतिशत हो गई. स्पेस-एक्स की सस्ते और दोबारा प्रयोग में लाए जा सकने वाले रॉकेटों के कारण वैश्विक बाजार में उसकी हिस्सेदारी बढ़ी है. अमेरिका की सरकारी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और स्पेस एक्स मिलकर वैश्विक बाजार में 65 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा जमाए हुए हैं. इसके बाद यूरोप की अंतरिक्ष एजेंसी एरियन स्पेस का नंबर आता है.