कल शाम को आई एक खबर के चलते आज सोशल मीडिया पर रघुराम राजन काफी चर्चा में हैं. इस खबर के मुताबिक रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर ने लोक सभा की एक संसदीय समिति को भेजी गई अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बैंकों के फंसे हुए भारी-भरकम कर्ज (एनपीए) के लिए यूपीए सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं. फेसबुक और ट्विटर पर इस हवाले से कांग्रेस को जमकर घेरा जा रहा है. फेसबुक पर विकास सिंह ने सवाल उठाया है कि कांग्रेस का हर नेता रघुराम राजन को बहुत ही होशियार और विश्वसनीय मानता रहा है, लेकिन क्या अब वे यह स्वीकार करेंगे कि एनपीए की समस्या 2008 से शुरू हुई थी.

2014 के दौरान केंद्र में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार बनने के बाद पार्टी के कई नेताओं ने रघुराम राजन की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए थे और इनमें सुब्रमण्यम स्वामी सबसे बड़े नाम थे. सोशल मीडिया पर इस बात का जिक्र करते हुए भी आज कुछ प्रतिक्रियाएं आई हैं. ट्विटर पर दुर्गेश सेन ने चुटकी ली है, ‘लो अब रघुराम राजन देशद्रोही नहीं रहे, देशभक्त हो गए हैं.’

हालांकि अपनी रिपोर्ट में राजन ने यह भी कहा है कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय को कुछ बड़े लोन डिफॉल्टरों की सूची भेजी थी ताकि उन पर नजर रखी जा सके या कार्रवाई हो सके. तब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन चुके थे. सोशल मीडिया पर राजन की रिपोर्ट के इस हिस्से का जिक्र करते हुए मोदी और भाजपा को भी कई लोगों ने निशाना बनाया है. स्नेहा सिंह ने भाजपा और उसके समर्थकों पर तंज कसते हुए टिप्पणी की है, ‘मीठा-मीठा गप-गप और कड़वा-कड़वा थू-थू!’

सोशल मीडिया में इस खबर पर आई कुछ दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :

कार्ल मार्क्स | @Karl_Maarx

रघुराम राजन संघी हैं... उनके नाम में ही राम लगा हुआ है...

चोपड़ा साब | @Chopdasaab

जब मोदी को नापसंद करने वालों को पता चला कि रघुराम राजन ताजा संकट के लिए एनडीए के बजाय मनमोहन सिंह को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं...

अरुण शौरी | @FeignShourie

रघुराम राजन ने हाई प्रोफाइल मामलों की सूची पीएमओ को भेजी थी ताकि कम से कम एक दो के खिलाफ कार्रवाई हो सके... लेकिन मोदी ने क्या किया? उन्होंने सुनिश्चित किया कि रघुराम राजन को आरबीआई से जाना पड़े और वहां उनकी कठपुतली बैठ जाए...

माधवन नारायणन | @madversity

भारतीय बैंकिंग सिस्टम में एनपीए संकट के लिए यूपीए और एनडीए, दोनों ही एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं और दोनों रघुराम राजन का हवाला दे रहे हैं!