तेलंगाना के जगतियाल में मंगलवार को एक बस के खाई में गिरने से 57 लोगों की मौत हो गई. इनमें 36 महिलाएं हैं. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. बताया जाता है कि राज्य परिवहन निगम की यह बस एक प्रसिद्ध मंदिर से श्रद्धालुओं को लेकर जा रही थी. ब्रेक फेल होने होने से यह हादसा होने की बात कही जा रही है. यह देश में इस तरह का अब तक का सबसे बड़ा हादसा बताया जा रहा है. तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने मृतकों के परिजनों को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है.

उधर, आंगनबाड़ी कर्मियों के मानदेय में बढ़ोतरी की खबर भी अखबारों की प्रमुख सुर्खियों में शामिल है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी घोषणा मंगलवार को की. इसके तहत इनके वेतन में 750 रुपये लेकर 1500 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है. इसके अलावा सरकार ने आशा कार्यकर्ताओं और सहायकों के लिए चार लाख रुपये तक की प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा योजना का ऐलान किया है.

भीमा-कोरेगांव हिंसा पूर्वनियोजित और पुलिस की लापरवाही का नतीजा : रिपोर्ट

बीती एक जनवरी को महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में पुलिस लापरवाही की बात सामने आई है. साथ ही, यह हिंसा पूर्वनियोजित भी थी. दैनिक भास्कर के पहले पन्ने पर प्रकाशित खबर के मुताबिक यह बात एक जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कही है. पुणे के डिप्टी मेयर सिद्धार्थ ढेंडे की अगुवाई में गठित इस समिति के मुताबिक इस हिंसा के पीछे संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे का हाथ था. साथ ही, इसमें कुछ पुलिसकर्मी भी शामिल थे, जिन्होंने वक्त पर कार्रवाई नहीं की. इस समिति का कहना है कि भीमा-कोरेगांव की हिंसा पहले से योजना बनाकर की गई थी और इसमें शामिल लोगों ने घटनास्थल पर पहले से ही सारी तैयारियां कर रखी थीं.

सात साल तक की सजा वाले मामले में तत्काल गिरफ्तारी से इलाहाबाद हाई कोर्ट का इनकार

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने वैसे मामले जिनमें सजा सात साल से कम है, आरोपित की तत्काल गिरफ्तारी से इनकार कर दिया है. अमर उजाला में छपी खबर के मुताबिक हाई कोर्ट ने एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) कानून के तहत दायर एक मामले की सुनवाई के दौरान यह फैसला किया. वहीं, अदालत में उत्तर प्रदेश सरकार ने भी इसी तर्क के आधार पर आरोपित की गिरफ्तारी से इनकार कर दिया. इसके बाद याचिकाकर्ता ने भी याचिका वापस ले ली. बताया जाता है कि गोंडा जिले की अनुसूचित जाति की शिवराजी देवी ने राजेश मिश्रा सहित अन्य तीन लोगों के खिलाफ एससी-एसटी कानून के तहत मामला दर्ज कराया था. उन पर घर में घुस कर उनकी बेटी को जातिसूचक गालियां देने और मार-पीट करने का आरोप लगाया गया था.

उत्तर प्रदेश : ग्रेटर नोएडा में हिंदू युवा वाहिनी ने मंदिर में कव्वाली के आयोजन का विरोध किया

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में हिंदू युवा वाहिनी ने कव्वाली को मुस्लिम परंपरा बताते हुए एक मंदिर में इसके आयोजन का विरोध किया है. नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह आयोजन बुधवार को होना तय किया गया था. हिंदू युवा वाहिनी का कहना है कि मुस्लिम परंपरा से संबंध होने के साथ इसमें अश्लील नाच भी होता है. इस शिकायत पर पुलिस ने इस पर रोक लगा दी है. दूसरी ओर, इसकी आयोजन समिति ने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को पत्र लिखा है. इसमें कहा गया है कि हिंदू युवा वाहिनी कव्वाली के बहाने सांप्रदायिक दंगा कराना चाहती है. बताया जाता है कि बीते 70 वर्षों से ग्रेटर नोएडा स्थित द्रोण मंदिर में कव्वाली का आयोजन होता रहा है.

बाल विवाह रोकने के लिए आरटीई के तहत 18 साल तक की शिक्षा लाने का सुझाव

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बाल विवाह को कम करने के लिए शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत 18 वर्षों तक की पढ़ाई शामिल करने का सुझाव दिया है. द इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर की मानें तो आयोग ने पाया है कि बाल विवाह और लड़कियों की शिक्षा में गहरा संबंध है. केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट में एनएचआरसी ने नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 के हवाले से कहा है कि 15 साल की आयु में स्कूल से निकलने के बाद बाल विवाह की आशंका बढ़ जाती है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 15 से 19 साल के बीच शादी करने वाली लड़कियों में तीस फीसदी अनपढ़ होती हैं. इसके अलावा 21.9 फीसदी प्राथमिक शिक्षा और 10 फीसदी माध्यमिक शिक्षा हासिल की हुई होती हैं.