महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा ‘प्रतिष्ठित संस्थान’ (इंस्टीट्यूट्स ऑफ एमिनेंस) का दर्जा प्राप्त करने वाले ग्रीनफील्ड शिक्षा संस्थानों को निर्माण के लिए जमीन और राजकोषीय मदद देने का फैसला किया है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक ऐसा करने वाला वह देश का पहला राज्य बन गया है. राज्य सरकार अब ऐसे संस्थानों के निर्माण के लिए और सरकारी सुविधाएं व रियायतें देगी. रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि इस फैसले से रिलायंस फाउंडेशन के जियो इंस्टीट्यूट को काफी फायदा मिलेगा.

खबर के मुताबिक संस्थान के निर्माण के लिए रिलायंस फाउंडेशन को मुंबई के महानगरीय क्षेत्र कर्जत तालुका में 800 एकड़ जमीन दिए जाने का प्रस्ताव है. इसके मुताबिक प्रतिष्ठित संस्थानों को दी गई जमीन पर ज्यादा बड़ी इमारतें बनाने की अनुमति होगी. निर्माण के लिए दी गई जमीन के जितने हिस्से पर इमारत बनाने की अनुमति दी जाती है उसे फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) अनुपात कहा जाता है. इसके तहत यह तय किया जाता है कि जमीन के कितने हिस्से पर निर्माण कार्य करना है. राज्य सरकार के फैसले के बाद जियो इंस्टीट्यूट को निर्माण के लिए दी जाने वाली कुल जमीन पर एफएसआई अनुपात तय करने का अधिकार होगा. हालांकि प्रतिष्ठित संस्थान का दर्जा मिलने के बाद जियो इंस्टीट्यूट को निर्माण शुरू करने की अनुमति अभी नहीं मिली है. वहीं, केंद्र ने शर्त रखी है कि संस्थान को 2021 से काम करना शुरू कर देना है.

राज्य सरकार ने संस्थान के लिए जमीन की व्यवस्था करने का रास्ता भी साफ कर दिया है. उसने प्रस्ताव रखा है कि जमीन की उपलब्धता के लिए ‘मुंबई टेनेंसी एंड एग्रीकल्चरल लैंड एक्ट, 1967’ के उस प्रावधान को अस्वीकार कर दिया जाए जिसके मुताबिक कृषि से संबंधित जमीन केवल किसी किसान को दी जा सकती है. सरकार ऐसी जमीनों पर भी निर्माण की इजाजत दे सकती है जो नो-डेवलेपमेंट जोन के तहत आती हैं. इनमें पहाड़ों के ऊपर की जमीनें और ढलान वाली जमीनें शामिल हैं. इसके अलावा सरकार अन्य विशेष छूटें भी देगी. इनमें जमीन का इस्तेमाल गैर-कृषि काम के लिए करना, निर्माण के लिए लगने वाले विकास शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट आदि शामिल हैं.

वहीं, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुरोध के बाद महाराष्ट्र के उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग ने प्रतिष्ठित संस्थानों को स्टैंप ड्यूटी देने से भी छूट देने का प्रस्ताव रखा था. हालांकि सूत्रों का कहना है कि राजस्व विभाग ने इसका विरोध किया है. इस पर सरकार ने मंत्रियों की सदस्यता वाली एक उप-समिति का गठन किया है जो राजस्व विभाग द्वारा उठाए गए मुद्दों का समाधान करेगी. उधर, राज्य के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने कहा है कि यह सब राज्य में विश्व स्तर के संस्थान स्थापित करने के लिए किया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी परियोजना का समर्थन करेगी. वहीं, अखबार के मुताबिक जब रिलायंस फाउंडेशन से इस बारे संपर्क किया गया तो उसने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

बता दें कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बीती नौ जुलाई को ग्रीनफील्ड परियोजना के तहत जियो इंस्टीट्यूट को प्रतिष्ठित संस्थान का दर्जा दिया था. मंत्रालय ने संस्थान खोलने के लिए छह प्रस्तावों को स्वीकृति दी थी. अधिकारियों का कहना है कि इनमें जियो इंस्टीट्यूट ग्रीनफील्ड परियोजना के रूप में एक मात्र संस्थान है. बाकी के पांच संस्थानों में भारतीय विज्ञान संस्थान, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) -दिल्ली, आईआईटी-बॉम्बे, बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी और मणिपाल अकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन शामिल हैं.