निर्देशक : तबरेज़ नूरानी
कलाकार : मृणाल ठाकुर, राजकुमार राव, मनोज बाजपेयी, रिचा चड्ढा, फ्रीडा पिंटो, आदिल हुसैन
रेटिंग : 4/5

वे औरतें जो शहर की सबसे बदनाम और ‘गंदी’ गलियों में रहती हैं. वे औरतें जो अपने आप में गालियां बन जाती हैं. वे औरतें जिनका खुद के अलावा खुदा भी नहीं होता. वे औरतें जिनके पास जाने से शरीफ मर्दों को हमेशा रोका जाता है. वे औरतें जो हर रात अपना जिस्म बेच देती हैं और हर अगले दिन सिर्फ रूह लिए घूमती हैं, और फिर भी मरते दम तक अपने शरीर के अंग-अंग में उठने वाले दर्द से राहत नहीं पातीं. उन्हीं औरतों की तरफ से आई एक चिट्ठी है – ‘लव सोनिया’. इस चिट्ठी में कुछ और औरतों का भी जिक्र है जिनके बिना इन पहली तरह की औरतों का होना मुमकिन न था. यह जिक्र उन औरतों का है जो मां थीं पर बेटियों के गुमने-बिकने का उन्हें पता भी न चला, जो दलाल थीं और चकले (वेश्यालय) से नोटों की गड्डियां लेकर बाहर निकली थीं. और सबसे ज्यादा जिक्र उनका है जिन्होंने अंतरात्मा से निकलती चीखों को मुंह पर हाथ रखकर भीतर ही गूंजते रहने के लिए रोक लिया था.

अफसोस इस बात का है कि ये फिल्मनुमा चिट्ठी जो कुछ कहती है, वह सबकुछ सच है. इतना कड़वा सच कि लगता है कि इस सच को न देखना-न जानना ही बेहतर होता. ‘लव सोनिया’ के निर्देशक तबरेज़ नूरानी का इस सच से पहला वास्ता साल 2003 में तब पड़ा जब लॉस एंजेल्स में चीन से आए कुछ कंटेनरों में लड़कियां पाई गईं. ये लड़कियां दुनियाभर में फैले देह व्यापार के नेटवर्क का हिस्सा थीं, या कहें शिकार थीं. इनमें से एक भारतीय भी थी जिसे फिल्म में सोनिया नाम दिया गया है. नूरानी ‘लव सोनिया’ का क्लाइमैक्स इसी घटना से प्रेरित होकर रचते हैं. लेकिन उसके पहले उनके पटकथा लेखक टेड केप्लन और अल्केश वाजा सोनिया के यहां तक पहुंचने की कहानी तफसील से बताते हैं.

एक कुंवारी-कमसिन लड़की के लिए इस दुनिया में पहुंच जाना कितना बड़ा शाप है, इस बात को ‘लव सोनिया’ बड़ी बेदर्दी से कई किस्तों में दिखाती है. उसके कुंवारेपन को बड़ा सौदा होने तक बचाकर रखने, लेकिन तब तक उस लड़की से आमदनी होते रहने के लिए उसके कैसे-कैसे इस्तेमाल किए जाते हैं, इसे परदे पर घटते देखकर आपकी रूह कांप जाती है. इसका श्रेय ऐसी लड़की बनने वाली मृणाल ठाकुर को जाता है जो अपने चेहरे, शरीर और चाल से एक-एक भाव को बहुत बारीकी से व्यक्त कर देती हैं. यह भी ताज्जुब की बात है कि टीवी सीरियल ‘कुमकुम भाग्य’ में बुलबुल के अपने किरदार के लिए मशहूर मृणाल ठाकुर को यहां आप बड़ी मुश्किल से पहचान पाते हैं. हजार से ज्यादा अभिनेत्रियों के ऑडिशन के बाद चुनी गई मृणाल सही मायनों में इस फिल्म की खोज हैं और इसके लिए तबरेज़ नूरानी का शुक्रिया अदा किया जाना चाहिए.

‘लव सोनिया’ में एक दृश्य है जिसमें सोनिया फल बेचने वाले एक छोटे बच्चे से पुलिस वाले का पता पूछती है. दो बातों में ही उस बच्चे को इस बात का अंदाजा लग जाता है कि वह लड़की कौन है और कहां से आई है. इसके बाद वह ‘ठुकम-ठुकाई’ दोहराते हुए उसका पीछे पड़ जाता है. यह एक दृश्य मानो यह बताने के लिए है कि लाल-रोशनी से भरी इस दुनिया में मर्द नाम की शय बस एक ही बात समझती है और किसी भी सोनिया से बस ‘ठुकम-ठुकाई’ चाहती है, भले ही यह कर पाने की उसकी औकात न हो! फिल्म में इस छोटे बच्चे का किरदार सनी पवार ने निभाया है. ये वही सनी पवार हैं जो साल 2016 में ‘लॉयन’ फिल्म में नायक के बचपन का किरदार निभाने और 2017 में ऑस्कर समारोह में शिरकत करने के लिए चर्चा में रहे थे. महज आठ साल के सनी इस एक दृश्य में ऐसा कमाल करते हैं कि याद रह जाते हैं.

फिल्म में ऐसे कई किरदार हैं जिनसे दर्शक लव-हेट रिलेशन बना सकता है, जैसे रिचा चड्ढा और आदिल हुसैन. दोनों ही अपनी मजबूरियों के शिकार हैं फिर भी दोनों में थोड़ी दया-माया बाकी है. यहां सई तम्हांकर और अनुपम खेर के किरदारों को नापसंद करते हुए आप उनके अभिनय से प्रभावित होते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा नफरत मनोज बाजपेयी के हिस्से में आती है. फैजल खान का यह किरदार बाजपेयी के सबसे डार्क किरदारों में से एक और नकारात्मक किरदारों को एक अलग ऊंचाई देने वाला कहा जा सकता है. इसमें वे दांत पीसकर और आंखे तरेरकर नहीं बल्कि सपाट एक्सप्रेशंस देकर देखने वाले में कोफ्त पैदा करते हैं. इनके अलावा अपनी छोटी भूमिकाओं में राजकुमार राव, फ्रीडा पिंटो और रिया सिसोदिया भी आपको पसंद आते हैं.

तबरेज़ नूरानी की ‘लव सोनिया’ यह तो दिखाती है कि दर्द और अपमान एक हद के पार हो जाए तो कुछ भी महसूस होना बंद हो जाता है, लेकिन साथ ही उस सुराख का भी पता दे जाती है, जहां से प्यार और उम्मीद की रोशनी छनकर आती है. सीधे शब्दों में कहें तो समस्या के साथ समाधान भी बताती है, बावजूद इसके कि यह सबसे स्याह फिल्मों में से एक है. अगर आप अच्छे सिनेमा के शौक के साथ-साथ एक बेहद मजबूत दिल भी रखते हैं तो ही इसे देखें, वरना कई दिनों की नींद और भूख गंवा सकते हैं.