भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी पर आपत्ति जताई है. संस्था की नई उच्चायुक्त मिशेल बैचेलेट ने अपने पहले भाषण में कहा था कि जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन की हालिया रिपोर्ट के बाद भी वहां हालात जस के तस हैं. उनका यह भी कहना था कि इस दिशा में कोई सुधार तो क्या गंभीर चर्चा तक नहीं हुई है. एनडीटीवी के मुताबिक इस पर भारत के प्रतिनिधि राजीव चंदेर ने कहा कि मानवाधिकार से जुड़े मसलों पर रचनात्मक तरीके से बात होनी चाहिए और ऐसा करते हुए राष्ट्रीय और क्षेत्रीय संप्रभुता का ध्यान भी रखा जाना चाहिए.

बीते जून में संयुक्त राष्ट्र संघ ने गुरुवार को कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले में अपनी तरह की पहली रिपोर्ट जारी की थी. साथ ही, उसने ऐसे मामलों की अंतरराष्ट्रीय जांच कराए जाने की जरूरत बताई थी. इसमें कहा गया था, ‘नियंत्रण रेखा के दोनों तरफ रहने वाले लोग पीड़ित हैं. उन्हें या तो अधिकार दिए ही नहीं जा रहे हैं या फिर बेहद सीमित ही हासिल हो रहे हैं. इस स्थिति को बदलने के लिए जल्द से जल्द अंतरराष्ट्रीय दख़ल की ज़रूरत है. भारत ने तब अपनी प्रतिक्रिया में इस रिपोर्ट को ‘भ्रामक’, ‘विवादास्पद’ और ‘दुर्भावना से प्रेरित’ बताया था. विदेश मंत्रालय ने इसे अपने ‘अांतरिक मामलों में दख़लंदाज़ी’ और भारत की ‘प्रभुसत्ता का उल्लंघन’ भी करार दिया था.