प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाने के मकसद से नई फसल खरीद नीति को मंजूरी दी है. इसके साथ ही कैबिनेट ने गन्ने से सीधे इथेनॉल का उत्पादन करने वाली मिलों को 59.18 रुपये प्रति लीटर कीमत देने की घोषणा की है. कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने बुधवार को बताया कि नई फसल खरीद नीति यह सुनिश्चित करेगी कि किसानों को उनकी फसलों के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के तहत मिलें.

केंद्र सरकार ने किसानों को एमएसपी के तहत फसलों का दाम दिलाने के लिए ‘प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान’ (पीएम - आशा) को भी मंजूरी दे दी है. इसके जरिए किसानों से फसल खरीद की प्रक्रिया को सरल और व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया जाएगा. इसके साथ ही अगर फसल की कीमत सरकार द्वारा तय एमएसपी के कम होगी तो भी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि किसानों को उनकी फसलों का दाम एमएसपी के तहत मिले. यह मध्य प्रदेश की भावांतर योजना की तर्ज पर काम करेगी, जिसमें फसल की कीमत एमएसपी से कम मिलने पर केंद्र सरकार किसानों के नुकसान की भरपाई करेगी. इसके साथ ही अब भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को मंजूरी दी गई है कि वह निजी कंपनियों से भी अनाज की खरीद करवा सकता है.

केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के बाद तेल एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि जो मिल गन्ने के रस से चीनी का उत्पादन किये बिना सीधे शत-प्रतिशत इथेनॉल बनाएंगी उन्हें प्रति लीटर 59.19 रुपये की कीमत दी जाएगी. इससे देश में इथेनॉल का उत्पादन बढ़ेगा. वर्तमान व्यवस्था के तहत पेट्रोल में 10 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जा सकता है. सरकार का लक्ष्य इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ाकर कच्चे तेल का आयात कम करना है. धर्मेंद्र प्रधान ने आगे बताया कि देश में वर्तमान में भारी मात्रा में चीनी का भंडार है और इस फैसले से गन्ना किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सकेगा.

बैठक के बाद रेलमंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि जल्द ही सभी बचे हुए ब्रॉड गेज रेल लाइनों का पूरी तरह से विद्युतीकरण किया जाएगा. पीयूष गोयल के मुताबिक ऐसा करने से रेलवे की डीजल पर निर्भरता कम होगी और प्रदूषण से भी मुक्ति मिलेगी. पीयूष गोयल ने यह भी कहा कि सारी ब्रॉड गेज रेल लाइनों का विद्युतीकरण हो जाने से रेलवे को हर साल ईंधन की मद में खर्च होने वाले 13,510 करोड़ रुपये की बचत हो पाएगी.

इसके साथ ही केंद्रीय कैबिनेट ने अमरावती, विजयवाड़ा, भोपाल और कुरुक्षेत्र में चार नए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (एनआईडी) बनाने फैसला किया है.