भारत की शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर काफी कुछ कहा जाता रहा है. इसी बदहाली को बयां करने का दावा करती एक तस्वीर सोशल मीडिया कुछ दिनों से वायरल है. इसमें कई सारी फ़ाइलों को कूड़े के ढेर में फेंका दिखाया गया है. दावा है कि ये फ़ाइलें कॉलेज की पढ़ाई के दौरान छात्रों को मिलने वाले प्रोजेक्ट की कॉपियां हैं जिन्हें चेक करने के बाद कूड़ेदान में फेंक दिया गया है.

आरवीसीजे मीडिया नाम के फ़ेसबुक पेज पर शेयर की गई इस तस्वीर को अब तक 72,000 से ज़्यादा बार शेयर किया जा चुका है. इसके कैप्शन में लिखा है, ‘भारत की यह बहुत बड़ी समस्या है. छात्रों को एक प्रोजेक्ट तैयार करने और उसे जमा कराने में महीनों लगते हैं. लेकिन उसके बाद इन फ़ाइलों से इस तरह का सलूक किया जाता है. छात्र कोई रोबोट नहीं हैं. उन्हें इन फ़ाइलों को तैयार करने में काफ़ी समय लगता है. भारत की शिक्षा व्यवस्था को उनकी मेहनत का सम्मान करना आना चाहिए.’

बड़ी संख्या में लोगों ने इस पोस्ट पर टिप्पणियां की हैं. तस्वीर देख कर कई लोगों का कहना है कि इसलिए छात्रों को प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए ज़्यादा मेहनत करने की ज़रूरत नहीं है. उनके मुताबिक़ छात्रों को गूगल से पुराने प्रोजेक्ट डाउनलोड कर नई फ़ाइलें तैयार कर लेनी चाहिए. कोई कह रहा है कि जूनियर छात्रों को अपने सीनियर छात्रों से उनके प्रोजेक्ट की कॉपियां मांग लेनी चाहिए, और फिर उन्हीं को नए रूप में सबमिट करा देना चाहिए. कुछ लोगों ने छात्रों की कमियों का भी ज़िक्र किया है. उनका कहना है कि तस्वीर देख कर शिक्षा व्यवस्था को कोसने से पहले यह भी देखना चाहिए कितने छात्र ईमानदारी से प्रोजेक्ट पूरा करते हैं.

लेकिन यह सब ऐसी तस्वीर के लिए हो रहा है जिसका भारत और यहां की शिक्षा व्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं है. शिक्षा की गुणवत्ता के मामले में भारत काफ़ी पीछे है लेकिन इसे साबित करने के लिए झूठी तस्वीरों या जानकारी का सहारा लेना सही नहीं है.

दरअसल यह तस्वीर नाइज़ीरिया की है. कई अंतरराष्ट्रीय वेबसाइटों पर यह पिछले साल दिखाई गई थी. लेकिन असल में इसे सबसे पहले दिसंबर 2016 में शेयर किया गया था. फ़ेसबुक सर्च के ज़रिए हमें पता लगा कि फ़्रैंकलिन ओकेचुक्वू ओन्वूबीको नाम के एक व्यक्ति ने तीन दिसंबर, 2016 को चार तस्वीरें शेयर की थीं. इन चारों को नीचे देखा जा सकता है.

फ़्रैंकलिन ओकेचुक्वू ओन्वूबीको/फ़ेसबुक
फ़्रैंकलिन ओकेचुक्वू ओन्वूबीको/फ़ेसबुक

फ़्रैंकलिन नाइजीरिया के एक विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर के कार्यालय में सूचना व जनसंपर्क अधिकारी हैं. उनके तस्वीरें शेयर करने के बाद कई लोगों ने उनसे पूछा था कि ये कहां की हैं. जवाब में अन्य फ़ेसबुक़ यूज़रों ने बताया कि ये प्रोजेक्ट फ़ाइलें यूनिवर्सिटी ऑफ़ कलाबार की हैं. साफ़ है इन तस्वीरों का भारत के किसी विश्वविद्यालय से कोई संंबंध नहीं है. हालांकि यह सवाल ज़रूर किया जा सकता है कि यहां ऐसी फ़ाइलों का क्या किया जाता है.