भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने लंदन में अपने एक बयान से भारत में राजनीतिक उथल-पुथल मचा दी है. भारत प्रत्यर्पित किए जाने के एक मामले में सुनवाई के बाद अदालत के बाहर विजय माल्या ने मीडिया से कहा कि वे भारत छोड़ने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिले थे और उनके सामने कर्जों के निपटारे का प्रस्ताव रखा था. विजय माल्या ने कहा, ‘मुझे बलि का बकरा बनाया जा रहा है’. विजय माल्या पर अलग-अलग बैंकों का नौ हजार करोड़ रु बकाया है. फिलहाल लंदन के एक कोर्ट में उनके प्रत्यर्पण को लेकर सुनवाई चल रही है.

विजय माल्या के इस बयान के बाद भारत में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उनके इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उनकी विजय माल्या से कोई आधिकारिक बैठक नहीं हुई थी. एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने कहा कि राज्यसभा सदस्य रहने के दौरान विजय माल्या ने एक बार जबरन उनके गले पड़ने की कोशिश की थी. अरुण जेटली के मुताबिक एक बार संसद में वे अपने कमरे की तरफ बढ़ रहे थे तो विजय माल्या उनके पास आए थे. जेटली के मुताबिक उन्होंने सिर्फ एक बात कही थी, ‘मैं सेटलमेंट का ऑफर दे रहा हूं.’ अरुण जेटली के मुताबिक इस पर उन्होंने कहा था कि उनसे बात करने का कोई फायदा नहीं है और माल्या बैंकों से बात करें.

उधर, कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर एक बार फिर मोदी सरकार पर हमला बोला है. पार्टी नेता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि जब यह बात सरकार और बैंकों को पता थी कि विजय माल्या पर हजारों करोड़ रुपए का कर्ज है तो उन्हें देश से बाहर कैसे जाने दिया गया.