हीरे-जवाहरात के कारोबारी नीरव मोदी को शायद कर्ज़ धोखाधड़ी का अपना भांडा फूटने की आशंका पहले ही हो गई थी. इसीलिए वह भारत के अलावा किसी अन्य देश की नागरिकता लेने की कोशिशें करने लगा था. सूत्रों के हवाले से यह ख़बर द इंडियन एक्सप्रेस ने दी है.

अख़बार के मुताबिक पंजाब नेशनल बैंक में 13,600 करोड़ रुपए की कर्ज़ धोखाधड़ी का ख़ुलासा होने से क़रीब तीन महीने पहले नीरव मोदी ने वनुआतू द्वीप की नागरिकता लेने की कोशिश की थी. इसके लिए उसने अपने अावेदन के साथ 1,95,000 डॉलर (लगभग 1.40 करोड़ रुपए) की रकम भी निजी बैंक ख़ाते से वनुआतू के एक एजेंट को भेजी थी. बताते हैं कि वनुआतू में यह उन 18 अधिकृत एजेंटों में से एक था जो दूसरे देशों के नागरिकों को अपने देश की नागरिकता दिलाने का इंतज़ाम करते हैं.

उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में स्थित और दक्षिणी प्रशांत महासागर के कुछ द्वीपों काे मिलाकर बना यह देश दुनिया के उन देशों में शुमार होता है, जहां एक निश्चित रकम का निवेश कर नागरिकता हासिल की जा सकती है. यहां इस किस्म के निवेशकों को दोहरी नागरिकता की सुविधा भी दी जाती है. यानी वे अपने मूल देश की नागरिकता को बरक़रार रखते हुए यहां के नागरिक भी बन सकते हैं. बताया जाता है कि नीरव मोदी ने वनुआतू की इसी व्यवस्था का फ़ायदा उठाने की कोशिश की थी.

हालांकि अख़बार के मुताबिक उसकी यह कोशिश सफल नहीं हुई. वनुआतू की कानूनी फर्म इंडिजीन लॉयर्स (इसे ही नीरव मोदी ने भुगतान किया था) के प्रबंधकीय साझीदार जस्टिन ग्वेले ने अख़बार के प्रश्नों के ज़वाब में माना, ‘हां, उन्होंने यहां की नागरिकता हासिल करने के लिए रकम अदा की थी. लेकिन हमारी वित्तीय ख़ुफिया इकाई ने इस आवेदन पर विचार करने से पहले उनके बारे में पड़ताल की तो अच्छी रिपोर्ट नहीं मिली. इसके बाद उनका आवेदन ख़ारिज़ कर दिया गया था.’