बिहार के मधेपुरा जिले में जातिगत भेदभाव का मामला सामने आया है. यहां हरिनारायण ऋषिदेव नाम के एक महादलित व्यक्ति को उसकी पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए जमीन देने से इनकार कर दिया गया. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक इसके बाद हरिनारायण को मजबूरी में पत्नी के शव को अपने घर में दफनाना पड़ा.

खबर के मुताबिक हरिनारायण केवतगामा गांव में एक दिहाड़ी मजूदर हैं. उनके गांव में कोई सामुदायिक शमशान नहीं है. बीते रविवार को उनकी पत्नी सहोगिया देवी की मौत हो गई थी. शमशान की सुविधा नहीं होने की वजह से वे गांव की ही किसी जमीन पर पत्नी का अंतिम संस्कार कराना चाहते थे. लेकिन गांव वालों ने इसकी इजाजत नहीं दी. इसके बाद उन्होंने अपने घर में ही पत्नी को दफनाने का फैसला किया.

बिहार में दलित समाज के सबसे गरीब तबके को नीतीश कुमार की सरकार ने विशेष श्रेणी के तहत महादलित का नाम दिया है. हरिनारायण भी महादलित हैं. उन्होंने अखबार को बताया कि जिन लोगों के पास जमीनें नहीं हैं उन्हें जीते जी सम्मान नहीं दिया जाता. उन्होंने कहा कि मरने के बाद भी उनके सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया जाता है. हरिनारायण ने कहा कि वे नहीं चाहते कि ऐसा उनके दूसरे भूमिहीन भाइयों के साथ हो, इसलिए वे दाह संस्कार के लिए अलग से शमशान बनाए जाने की मांग करते हैं.

गांव के पूर्व मुखिया बेचन ऋषिदेव भी हरिनारायण के साथ हुए अन्याय की पुष्टि करते हुए कहते हैं, ‘अनुसूचित जाति के भूमिहीन और उत्पीड़ित लोगों को मरने के बाद भी शांति नहीं मिलती. हरिनारायण की पीड़ा सरकार तक पहुंचनी चाहिए और उसे तुरंत इस मामले कोई कदम उठाना चाहिए. नहीं तो हम विरोध प्रदर्शन करेंगे.’ उधर, हरिनारायण के साथ हुई घटना के बाद मधेपुरा के सब-डिविजनल अधिकारी बृंदा लाल सर्किल ऑफिसर कुमारखंड के साथ गांव पहुंचे. गांव वालों से बात करने के बाद उन्होंने दाह संस्कार के लिए अलग से जमीन मुहैया कराने का आश्वासन दिया है.