अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत ने गूगल जैसी कंपनी के कर्मचारियों को भी असहज किया था. यह ख़ुलासा बुधवार को सामने आए एक वीडियाे के जरिए हुआ है. गूगल के कर्मचारियों की निजी बैठक का यह वीडियो अमेरिकी मीडिया में लीक हुआ है.

ख़बरों के मुताबिक वीडियो क़रीब एक घंटे की अवधि का है. इसमें गूगल की मूल कंपनी- अल्फाबेट के अध्यक्ष सर्गेई ब्रिन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सुंदर पिचाई अपने कर्मचारियों को सांत्वना देते दिख रहे हैं. इसमें पिचाई यह स्वीकार करते हुए भी सुने जा सकते हैं कि चुनाव प्रचार के दौरान वीज़ा और आव्रजन संबंधी मसलों पर ट्रंप की जो सख़्त और पक्षपाती टिप्पणियां आई हैं उससे गूगल के ‘ख़ास तौर पर दूसरे देशों के कर्मचारियों में भय का वातावरण पैदा हो गया है.’

इस बैठक में कंपनी की उपाध्यक्ष एलीन नॉटन भी मौज़ूद थीं. उन्होंने कर्मचारियों काे यह मशविरा दिया कि ‘राजनीतिक परिदृश्य के सभी पहलुओं को देखना, समझना और स्वीकार करना चाहिए.’ इस वीडियो के सामने आने बाद अमेरिकी राष्ट्रपति के समर्थकों ने इस मामले की जांच की मांग कर दी है. राष्ट्रपति ट्रंप के अभियान प्रबंधक ब्रैड पार्सेल ने ट्वीट किया, ‘कंपनी (गूगल) को बताना चाहिए कि इस सब को लोकतंत्र के लिए ख़तरा क्यों न माना जाए? इसकी संसदीय समिति से जांच होनी चाहिए.’

गूगल की ओर से भी तुरंत स्थिति संभालने की कोशिश की गई. कंपनी की प्रवक्ता रिवा सियुटो ने एक बयान जारी कर कहा, ‘बीते 20 सालों से गूगल में यह परंपरा रही है कि बैठकों में हर कर्मचारी खुलकर अपनी बात रख सकते हैं. जिस मीटिंग का ज़िक्र किया जा रहा है उसमें भी वही हुआ. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कंपनी के कर्मचारी किसी राजनीतिक पक्ष की तरफ झुके या अन्य से चिंतित हैं. या फिर उन्हें ये लगता है कि काेई सरकार उनके तौर-तरीकों को प्रभावित करने वाली है.’